नई दिल्ली। देश में खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। बीज, सिंचाई, मजदूरी और रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, लंबे समय तक केमिकल फर्टिलाइजर के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ऐसे में किसान अब कम लागत और टिकाऊ खेती के विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
किचन वेस्ट से खाद बनाने की विधि
सब्जी और फलों के छिलके, बची हुई चायपत्ती तथा सूखे पत्तों को एक बड़े गड्ढे या कंपोस्ट बिन में इकट्ठा करें। इसमें थोड़ा गोबर और केंचुए मिला दें। केंचुए इस कचरे को खाकर वर्मीकंपोस्ट यानी ब्लैक गोल्ड में बदल देते हैं।इस घरेलू जैविक खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और उनकी वृद्धि तेज करते हैं। यह मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाती है, मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ रखती है तथा बार-बार सिंचाई की जरूरत कम करती है।यह खाद पूरी तरह नेचुरल है और बनाने में लगभग शून्य लागत आती है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पैदावार बढ़ने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
कैसे तैयार करें घर पर ऑर्गेनिक खाद?
किचन वेस्ट से खाद बनाना अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया है और इसके लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
सबसे पहले किसान या बागवानी करने वाले लोग एक गड्ढा, ड्रम या कंपोस्ट बिन तैयार करें। इसके बाद उसमें सब्जियों और फलों के छिलके, बची हुई चायपत्ती, सूखी घास और सूखे पत्ते इकट्ठा करें।
इस मिश्रण में थोड़ी मात्रा में गोबर मिलाया जा सकता है, जिससे अपघटन की प्रक्रिया तेज होती है। यदि वर्मीकंपोस्ट तैयार करना हो तो इसमें केंचुओं को भी डाला जा सकता है। केंचुए जैविक पदार्थों को खाकर उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली खाद में बदल देते हैं।समय-समय पर मिश्रण में नमी बनाए रखना जरूरी होता है। कुछ सप्ताह या महीनों के भीतर यह जैविक कचरा सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल जाता है।
चलते चलते जानकारी देते चले कि, खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच किचन वेस्ट से तैयार ऑर्गेनिक खाद किसानों के लिए एक प्रभावी समाधान बन सकती है। यह न केवल कम लागत में उपलब्ध होती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जलधारण क्षमता बढ़ाने और फसल उत्पादन को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
