तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने नई डील पर मंजूरी दे दी है। व्हाइट हाउस में रिपोर्टर से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर इसी सप्ताह यूरोप में दस्तखत हो सकते हैं। ट्रम्प के अनुसार, अगर सब कुछ ठीक रहा तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि डील होते ही होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया जाएगा। उन्होंने इससे पहले ईरान पर शुक्रवार को भीषण बमबारी करने और तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी दी थी। इसके पांच घंटे बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों का फैसला रद्द कर दिया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान की टॉप लीडरशिप के साथ बातचीत आगे बढ़ गई है, लेकिन समझौता पूरी तरह तय होने तक होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।
व्हाइट हाउस में ट्रम्प का बड़ा दावा
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता काफी आगे बढ़ चुकी है और यदि सभी शर्तों पर सहमति बन जाती है तो समझौते पर यूरोप में हस्ताक्षर हो सकते हैं।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी भी संभव है। उनके अनुसार, यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंध सुधारने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद कर सकता है।राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान ने वैश्विक राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं।
हालांकि दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ट्रम्प समझौते को लगभग अंतिम चरण में बता रहे हैं, वहीं ईरान अभी भी इसे समीक्षा प्रक्रिया में मान रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में वार्ता की दिशा और दोनों देशों की आधिकारिक घोषणाएं यह तय करेंगी कि यह संभावित समझौता वास्तव में ऐतिहासिक सफलता बनता है या नहीं।
फिलहाल दुनिया की निगाहें यूरोप में संभावित वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इन दोनों का प्रभाव केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
