नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में अल-नीनो की स्थितियों से जुड़े खतरों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने राज्यों से अल-नीनो के प्रभाव के लिए तैयार रहने और जल संरक्षण के लिए मजबूत कदम उठाने को कहा।प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का विषय ‘विकसित भारत बैठक में 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों तथा प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में हिस्सा लिया।
क्या है अल-नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?
अल-नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसका असर केवल महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करता है।
भारत के संदर्भ में अल-नीनो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध दक्षिण-पश्चिम मानसून से माना जाता है। आमतौर पर अल-नीनो की स्थिति बनने पर मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे वर्षा सामान्य से कम होती है। कम बारिश का असर कृषि उत्पादन, पेयजल उपलब्धता, जलाशयों के जलस्तर और बिजली उत्पादन तक पर पड़ सकता है।
वही इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो की तीव्रता बढ़ने पर कई राज्यों में सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इससे किसानों की आय प्रभावित हो सकती है और खाद्य उत्पादन पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने राज्यों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है।
चलते चलते बता दें कि, अल-नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए प्रधानमंत्री का यह संदेश समयानुकूल माना जा रहा है। जल संरक्षण, जलवायु अनुकूलन, तकनीकी नवाचार और समन्वित शासन की रणनीति ही आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। भारत के लिए यह केवल मौसम संबंधी चेतावनी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी है।
