शिमला। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक विभिन्न घटनाओं में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। किन्नौर जिले के पूह उपमंडल के लिप्पा में पेजर नाले में बाढ़ और मलबे से तेती खड्ड का बहाव रुक गया, जिससे लिप्पा गांव को जोड़ने वाला करीब 100 फीट लंबा लोहे का बेली ब्रिज पानी में डूब गया।
बुधवार को कुल्लू की गड़सा घाटी में बादल फटने से गड़सा नाले में भीषण बाढ़ आई, जिसमें 10 छोटे पुल बह गए। पुल बंद होने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजधानी शिमला में लगातार बारिश के कारण कई हिस्सों में भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं हुई हैं। विकासनगर में पहाड़ी से पत्थर गिरने से दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, गुरुवार देर शाम तक 75 सड़कें बंद हो गईं। बिजली वितरण के 29 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए और पानी की पांच योजनाएं बाधित हुईं। शुक्रवार को शिमला सहित कई जिलों में स्कूल बंद रहे।
लगातार बारिश से बढ़ा संकट
मानसून की सक्रियता के कारण राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही है। इसके चलते नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है तथा कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी इलाकों में मलबा आने से सड़क संपर्क बाधित हो गया है और कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित इलाकों में आवश्यक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मानसून के दौरान सावधानी क्यों जरूरी?
हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में मानसून के दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे समय में यात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने, जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेना और आवश्यक होने पर यात्रा टाल देना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
