मुंबई। अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी की फिल्म ‘धमाल 4’ रिलीज हो गई है। इंद्र कुमार द्वारा निर्देशित इस फिल्म की लंबाई 2 घंटे 23 मिनट है। फिल्म में रवि किशन, अंजलि आनंद, संजय मिश्रा, ईशा सिंह और संजीदा खान भी भूमिकाओं में हैं।
जानकारी दे दें कि, कहानी में गुड्डू (अजय देवगन), आदी (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी) और लल्लन (रितेश देशमुख) शैतान सिंह के 100 साल पुराने खजाने की तलाश में निकलते हैं। फिल्म में जबरदस्ती की कॉमेडी दिखाई गई है। इसमें धमाल सीरीज के पिछले भागों की झलक भी है। रितेश देशमुख और जावेद जाफरी अपने किरदारों में कमाल दिखा रहे हैं।
इस संबंध में हम आपको बता दें कि, फिल्म में अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी की कॉमेडी जबरदस्त है। आदि और मानव दर्शकों को हंसाते हैं। रवि किशन समुद्री डाकू के रूप में नजर आए हैं। संजीदा शेख और अंजलि आनंद का काम शानदार है। अजय देवगन सितारों की भीड़ में कुछ खोते नजर आए।ग्राफिक्स परेशान करने वाले हैं। जबरदस्ती के जोक्स बोर करते हैं। कहानी पिरोने की कोशिश नाकाम रही। म्यूजिक खास नहीं है। धमाल की पुरानी फिल्में इस वर्जन से बेहतर मानी गई हैं। फिल्म को दो स्टार रेटिंग दी गई है।
खजाने की तलाश पर आधारित है कहानी
फिल्म की कहानी चार प्रमुख किरदारों—गुड्डू (अजय देवगन), आदी (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी) और लल्लन (रितेश देशमुख)—के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्हें शैतान सिंह का लगभग 100 साल पुराना छिपा हुआ खजाना मिलने की जानकारी मिलती है। इसके बाद सभी उस खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं और रास्ते में कई अजीबोगरीब परिस्थितियों का सामना करते हैं।
निर्माताओं ने कहानी में एडवेंचर, कॉमेडी और रोमांच का मिश्रण पेश करने की कोशिश की है। हालांकि, जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, कहानी कई जगह कमजोर पड़ती नजर आती है। कई दृश्य ऐसे महसूस होते हैं जिन्हें केवल हास्य पैदा करने के लिए जोड़ा गया है, जबकि उनका कहानी से सीधा संबंध कम दिखाई देता है।
‘अंत मे बताते चले कि, धमाल 4’ में शानदार कलाकार, बड़े स्तर का निर्माण और कॉमेडी का भरपूर प्रयास देखने को मिलता है। इसके बावजूद फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी और असंतुलित स्क्रीनप्ले बनकर सामने आती है। कलाकारों का अभिनय कई दृश्यों को संभालता है, लेकिन कमजोर लेखन के कारण फिल्म अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती।कुल मिलाकर, ‘धमाल 4’ एक ऐसी पारिवारिक कॉमेडी है जो कुछ जगह हंसाती है, कुछ जगह पुरानी यादें ताजा करती है, लेकिन एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनने से थोड़ी पीछे रह जाती है।
