कोलकाता। पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक (रूक्मिणी मल्लिक) ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर इस्तीफा सौंपा।इस्तीफा सौंपने के बाद कोयल मल्लिक दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर उनसे मिलने पहुंचीं। बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में जारी बगावत के बीच यह ममता बनर्जी को एक और झटका माना जा रहा है।
जानकारी देते चले कि, यह दो महीने के भीतर राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की तरफ से चौथा इस्तीफा है। इससे पहले पिछले महीने सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दिया था। इन तीनों ने बाद में भाजपा में शामिल होकर राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा की उम्मीदवारी हासिल की। 24 जुलाई को होने वाले इन उपचुनावों में भाजपा के संख्या बल के आधार पर उनकी जीत तय मानी जा रही है।
राज्यसभा सभापति को सौंपा इस्तीफा
जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। संसदीय परंपरा के अनुसार, राज्यसभा सांसद अपना इस्तीफा सभापति को सौंपते हैं, जिसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उस पर निर्णय लिया जाता है।
यदि इस्तीफा स्वीकार किया जाता है, तो संबंधित सीट रिक्त घोषित की जाती है और आवश्यक होने पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होती है।
टीएमसी के लिए लगातार बढ़ रही चुनौती
कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा इस्तीफा देने और नई राजनीतिक राह चुनने की घटनाओं ने संगठनात्मक स्थिति को लेकर भी चर्चाओं को जन्म दिया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि लगातार वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों से पार्टी के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है। हालांकि, टीएमसी नेतृत्व की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यहां यह जानना अकि आवश्तृयक हैं कि, तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक का इस्तीफा पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इस्तीफा सौंपने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से उनकी मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, उनके भविष्य के राजनीतिक कदमों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
