नई दिल्ली।तुलसी की खेती किसानों के लिए कम लागत में अच्छी कमाई का विकल्प बन रही है। औषधीय पौधों की बढ़ती मांग के कारण आयुर्वेदिक उत्पादों, हर्बल कंपनियों और प्राकृतिक उत्पादों में इसकी निरंतर जरूरत बनी रहती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छा उत्पादन लेने के लिए सही समय पर बुवाई, बेहतर किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल आवश्यक है।
इस संबंध में कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून-जुलाई का महीना तुलसी की नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त है। एक एकड़ खेत के लिए 250 से 300 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। जब नर्सरी में पौधे 4-5 हफ्ते के हो जाएं और उनकी लंबाई 10-15 सेंटीमीटर पहुंच जाए, तब मुख्य खेत में रोपाई करनी चाहिए। रोपाई के समय लाइनों के बीच 45 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 30 सेंटीमीटर की दूरी रखें, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह और हवा मिले तथा बेहतर विकास हो।
जून-जुलाई का समय नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तुलसी की खेती की सफलता काफी हद तक नर्सरी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। नर्सरी तैयार करने के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम और नमी की स्थिति पौधों के बेहतर अंकुरण और विकास में मदद करती है।
एक एकड़ क्षेत्र के लिए लगभग 250 से 300 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं। अच्छी गुणवत्ता और प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है तथा रोगों का खतरा भी कम रहता है। स्वस्थ पौध तैयार होने के बाद ही उन्हें मुख्य खेत में स्थानांतरित करना चाहिए।
अंत में जानकारी देते चले कि, तुलसी को अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए। बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, जबकि गर्मी में 7-10 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। कटाई का सबसे महत्वपूर्ण तरीका यह है कि जब पौधों पर फूल आने लगें, तब जमीन से 15-20 सेंटीमीटर ऊपर से काटें। इससे नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और एक सीजन में 2-3 बार पैदावार ली जा सकती है। कटाई के बाद पत्तियों को छांव में सुखाएं ताकि उनका प्राकृतिक तेल और खुशबू बरकरार रहे तथा बाजार में अच्छे दाम मिल सकें।
