नई दिल्ली।शिमला मिर्च ऐसी सब्जी है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। होटल, रेस्टोरेंट, सुपरमार्केट और स्थानीय मंडियों में इसकी अच्छी खपत होती है। कई किसान पारंपरिक सब्जियों के साथ इसकी खेती कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ पौधे लगा देने से अच्छी पैदावार नहीं मिलती। शुरुआत से सही किस्म का चुनाव, खेत की तैयारी और समय पर देखभाल करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकते हैं।
इस कड़ी में बता दे कि, शिमला मिर्च की खेती के लिए अच्छे बीजों का चुनाव करना जरूरी है जो इलाके की जलवायु के हिसाब से उपयुक्त हों। किसान हरी, पीली और लाल रंग की वैरायटी चुन सकते हैं क्योंकि बाजार में रंगीन शिमला मिर्च ऊंचे दामों पर बिकती हैं। बुवाई के लिए डायरेक्ट विधि के बजाय प्रोटेक्टर प्रो-ट्रे में कोकोपीट का इस्तेमाल कर हेल्दी नर्सरी तैयार करें। जब पौधे 4 से 5 पत्तियों के हो जाएं तब उन्हें खेत में ट्रांसप्लांट करें। पौधे लगाने के लिए मेड़ बनाएं, जिससे जड़ों की ग्रोथ अच्छी होती है और पानी रुकने से होने वाली बीमारियां कम होती हैं।
अंत में जानकारी देते चले कि, अच्छी फसल के लिए मल्चिंग फिल्म और ड्रिप इरिगेशन अपनाएं। मल्चिंग से खरपतवार नहीं उगते और मिट्टी की ताकत पौधों को मिलती है। ड्रिप सिस्टम से पौधों को जरूरत के अनुसार पानी मिलता है और नमी बनी रहती है। खाद देने के लिए फर्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल करें, जिसमें पानी में घुलनशील खाद को ड्रिप के जरिए सीधे जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे खाद बर्बाद नहीं होती और पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
