नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों का जवाब कायरता और क्रूरता से दिया है। सोनिया गांधी ने छात्रों के साथ राष्ट्र के दुश्मनों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया।
हम आपको बता दें कि, एक अखबार में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से पुलिस कार्रवाई तुरंत रोकने और संवाद शुरू करने की अपील की। उन्होंने 20 जुलाई के संसद चलो मार्च को कलंक का दिन बताया। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ हफ्तों से पूरे भारत में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के पतन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें सरकार से जवाबदेही और शिक्षा सुधार की हैं।
गौरतलब है कि, 20 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने बर्बर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। दर्जनों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी घायल हुए और घर लौट रहे छात्रों को भी नहीं बख्शा गया। सोनिया गांधी ने दावा किया कि विरोध में शामिल युवाओं के शरीर छर्रों से जख्मी हैं और इसका आदेश केंद्रीय गृह मंत्री ने दिया होगा।सोनिया गांधी ने शिक्षा बजट में कटौती का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा के हिस्से में 50 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 33 प्रतिशत की कटौती की गई है। पिछले 12 सालों में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए जबकि 43,000 निजी स्कूल खोले गए। उन्होंने NTA को बेबस संस्था बताया जो निजी ठेकेदारों पर निर्भर है।
अंत में यहां बताते चले कि, एनईईटी पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष लगातार सरकार से संवाद और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रही है आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर यदि सभी पक्ष छात्रों के हित को प्राथमिकता दें, तो परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
