नई दिल्ली। अधिकतर लोग ताजी सब्जियां खाना पसंद करते हैं, क्योंकि बाजार की सब्जियां हमेशा ताजी नहीं लगतीं। बारिश का मौसम मूली लगाने के लिए अच्छा माना जाता है। इस समय मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। थोड़ी देखभाल के साथ गमले या घर के पास खाली जगह में मूली उगाई जा सकती है।मूली की अच्छी फसल के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रोज कुछ घंटे धूप आती हो। गमले में उगाने पर कम से कम 10 से 12 इंच गहरा गमला लें, ताकि जड़ को बढ़ने की पर्याप्त जगह मिले। हल्की और भुरभुरी मिट्टी सबसे अच्छी होती है। इसमें गोबर की सड़ी हुई खाद या जैविक खाद मिलाई जा सकती है।
इस कड़ी में बता दें किु, बीज को लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई में लगाएं और एक बीज से दूसरे के बीच थोड़ी दूरी रखें। लगाने के बाद हल्का पानी दें। कुछ दिनों में पौधे निकलने लगेंगे। बारिश के मौसम में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। जब मिट्टी सूखी लगे तभी हल्का पानी दें। गमले में पानी भरने पर तुरंत निकाल दें, अन्यथा जड़ खराब हो सकती है। समय-समय पर घास-फूस निकालते रहें और कीड़े दिखने पर पौधों को नुकसान न पहुंचाने वाली दवा का इस्तेमाल करें।मूली की कई किस्में 30 से 45 दिनों के भीतर तैयार हो जाती हैं। जब ऊपरी हिस्सा मिट्टी से थोड़ा बाहर दिखने लगे और आकार अच्छा हो जाए, तब निकाल सकते हैं। सही देखभाल से घर में उगाई मूली ताजी, स्वादिष्ट और पौष्टिक मिलती है।
सही स्थान का चुनाव है सबसे जरूरी
मूली की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले सही जगह का चयन करना आवश्यक है। ऐसी जगह चुनें जहां प्रतिदिन कम से कम 4 से 6 घंटे तक धूप आती हो। पर्याप्त धूप मिलने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और जड़ का विकास भी अच्छी तरह होता है।
यदि आप गमले में मूली उगा रहे हैं, तो कम से कम 10 से 12 इंच गहरा गमला या ग्रो बैग चुनें। गहराई पर्याप्त होने से मूली की जड़ को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और उसका आकार भी अच्छा बनता
कैसी होनी चाहिए मिट्टी
मूली की खेती के लिए हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। भारी और सख्त मिट्टी में जड़ का विकास प्रभावित हो सकता है।
मिट्टी तैयार करते समय उसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद मिला सकते हैं। जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ पौधों को आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराती है। इससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत भी कम हो जाती है।
अंत में हम आपको बता दे कि, बरसात का मौसम मूली की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करता है। सही गमला, उपयुक्त मिट्टी, सीमित सिंचाई और नियमित देखभाल के साथ आप अपने घर में ही स्वादिष्ट, ताजी और पौष्टिक मूली की फसल तैयार कर सकते हैं। थोड़ी-सी मेहनत से न केवल ताजी सब्जियां मिलेंगी, बल्कि बागवानी का आनंद भी मिलेगा और परिवार को स्वस्थ भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
