नई दिल्ली ।बगीचे में फलों का पेड़ लगाने का ख्याल आते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक ही डर बैठ जाता है कि फल आने में सालों लग जाएंगे। सच यह है कि यह धारणा हर पौधे पर लागू नहीं होती। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ पौधे ऐसे भी हैं, जो थोड़ी सी सही देखभाल के बदले चंद महीनों में ही फलों से भर जाते हैं। इनमें पपीता, नींबू, कलमी अमरूद, केला और स्ट्रॉबेरी शामिल हैं।
औसत तापमान 18 डिग्री सेल्सियस वाली मौसम में पपीता सबसे अच्छी पैदावार देता है। इसे लगाने के लिए 2×2 मीटर की दूरी पर लंबा चौड़ा और गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है, जिसमें पौधा लगाने से करीब 10 दिन पहले 20 किलो गोबर खाद, 500 ग्राम सुपर फास्फेट और 250 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश मिलाई जाती है। यह पौधा तेजी से बढ़ता है और सिर्फ 8 से 10 महीने में फल देना शुरू कर देता है।
.यहां हम आपको यह बता दें कि, नींबू की रोपाई के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सबसे बेहतर माना जाता है। पौधों के बीच करीब साढ़े चार मीटर की दूरी रखनी चाहिए और गड्ढे में गली हुई गोबर खाद के साथ सिंगल सुपर फास्फेट मिलाना जरूरी है। सही देखभाल में महज चार महीने में यह फूल-फल देना शुरू कर सकता है और गमले में भी आसानी से पनप जाता है। अगर बीज से लगाएंगे तो अमरूद में फल आने में दो से छह साल तक लग सकते हैं, लेकिन कलम यानी ग्राफ्टेड पौधा लगाया जाए तो यही इंतजार घटकर सिर्फ एक से तीन साल रह जाता है। इसलिए नर्सरी से पौधा खरीदते वक्त हमेशा कलमी वैरायटी ही मांगें।
वही यह भी जानना आवश्सयक है कि, सही पानी और नियमित खाद मिलते ही केला करीब एक साल के भीतर फल देने लगता है और इसकी देखभाल में कोई खास तकनीकी झंझट भी नहीं होता। यही वजह है कि शुरुआती गार्डनर्स के लिए भी यह आसान विकल्प माना जाता है। स्ट्रॉबेरी को गमले में लगाने के लिए सामान्य मिट्टी में बराबर मात्रा में कोकोपीट और गोबर या वर्मी कंपोस्ट खाद मिलानी चाहिए। सही धूप और नियमित देखभाल के साथ यह कुछ ही महीनों में फल देना शुरू कर देती है।गमले में लगाए गए फलदार पौधों को शुरुआत में गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट और बायो एनपीके देना चाहिए, जबकि फल लगने के दौरान बोनमील, प्रोम और ऑर्गेनिक पोटाश खाद डालनी चाहिए। अगर पौधे की ग्रोथ रुक जाए तो प्लांट ग्रोथ प्रमोटर नाम के ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर का छिड़काव फायदेमंद साबित होता है। पानी तभी दें जब मिट्टी सूख जाए, वरना जड़ें सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
फलदार पौधों की देखभाल के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
किसी भी फलदार पौधे से अच्छा उत्पादन पाने के लिए केवल रोपाई ही पर्याप्त नहीं होती। पौधों को समय-समय पर जैविक खाद देना, आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करना, खरपतवार हटाना और कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करना भी जरूरी है। पानी का अत्यधिक जमाव कई पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए जल निकासी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
यदि पौधों को उनकी आवश्यकता के अनुसार धूप, पोषण और देखभाल मिले तो घर का छोटा-सा बगीचा भी कुछ ही महीनों में ताजे फलों से भर सकता है। पपीता, नींबू, कलमी अमरूद, केला और स्ट्रॉबेरी जैसे पौधे उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं जो कम समय में अपने किचन गार्डन का लाभ उठाना चाहते हैं। सही तकनीक अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने घर में पौष्टिक और ताजे फलों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकता है।
