नई दिल्ली। सिंचाई के लिए किसान अब सोलर पंप लगा रहे हैं और पीएम कुसुम योजना का लाभ भी ले रहे हैं। इस योजना के तहत देशभर में लाखों किसान अपने खेतों में सोलर पंप लगवा चुके हैं। इससे बिजली कटौती और डीजल के बढ़ते खर्च की चिंता कम हुई है। अगर सोलर पंप कभी बंद हो जाए या उसमें तकनीकी खराबी आ जाए तो रिपेयरिंग का खर्च किसकी जिम्मेदारी होती है, यह जानना जरूरी है।
यहां जानकारी दे दें कि, सरकारी योजना के तहत लगाए गए सोलर पंप पर इंस्टॉलेशन की तारीख से 5 साल तक की कॉम्प्रिहेंसिव वारंटी मिलती है। इस दौरान पंप, मोटर, कंट्रोलर या सोलर पैनल में तकनीकी खराबी आने पर रिपेयरिंग का खर्च किसान को नहीं उठाना पड़ता। खराब पार्ट बदलने का खर्च भी वेंडर कंपनी की जिम्मेदारी होती है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की गाइडलाइंस के तहत वारंटी के दौरान मेंटेनेंस और सर्विस का जिम्मा संबंधित वेंडर पर रहता है। कंपनी की सर्विस टीम को मौके पर पहुंचकर समस्या चेक करनी होती है और जरूरी रिपेयरिंग करनी होती है। हालांकि चोरी, जानबूझकर नुकसान या गलत इस्तेमाल से हुई खराबी पर नियम अलग हो सकते हैं।
इस कड़ी में बता दे कि, सोलर पंप में खराबी आते ही तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए MNRE या राज्य की संबंधित एजेंसी के टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 पर संपर्क किया जा सकता है। कंपनी के सर्विस पोर्टल या ऐप के जरिए भी ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज करने की सुविधा मिलती है। शिकायत पर टोकन या कंप्लेंट नंबर मिलता है, जिससे स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। नियमों के मुताबिक कंपनी की सर्विस टीम तय समयसीमा में खेत पर पहुंचकर जांच करती है। तकनीकी खराबी मिलने पर वारंटी के तहत रिपेयरिंग या पार्ट रिप्लेसमेंट किया जाता है।
5 साल की वारंटी पूरी होने के बाद फ्री सर्विस की सुविधा खत्म हो जाती है। इसके बाद तकनीकी खराबी आने पर रिपेयरिंग और पार्ट्स बदलने का खर्च आमतौर पर किसान को खुद उठाना पड़ता है। सोलर पैनल की परफॉर्मेंस वारंटी कई मामलों में करीब 25 साल तक रहती है, जबकि मोटर, कंट्रोलर और अन्य इलेक्ट्रिकल पार्ट्स की वारंटी अलग हो सकती है। 5 साल बाद किसान कंपनी के साथ AMC यानी Annual Maintenance Contract भी ले सकता है, जिसके तहत सालाना तय फीस देकर नियमित सर्विस और मेंटेनेंस कराई जा सकती है।
