नई दिल्ली। बहुत से किसान हर साल अपने खेत में एक ही तरह की फसल उगाते हैं। कभी फायदे के लिए तो कभी आदत की वजह से। लेकिन लगातार एक ही फसल लगाने से मिट्टी को काफी नुकसान होता है।मिट्टी की ताकत कम हो जाती है क्योंकि हर फसल को मिट्टी से अलग-अलग चीजें चाहिए होती हैं। कोई फसल ज्यादा पानी खींचती है तो कोई और पोषक तत्व। अगर हर साल एक ही फसल लगाई जाए तो मिट्टी से बार-बार वही चीजें निकलती रहती हैं। धीरे-धीरे मिट्टी में वे तत्व कम पड़ने लगते हैं जिससे मिट्टी कमजोर हो जाती है। इससे अगली फसल पहले जितनी अच्छी नहीं होती और उपज कम होने लगती है।
यहां इस कड़ी में बता दें कि, मिट्टी सख्त होने लगती है। मिट्टी के अंदर अच्छे बैक्टीरिया और छोटे जीव होते हैं जो मिट्टी को हल्का और भुरभुरा बनाए रखते हैं। एक ही फसल बार-बार लगाने से यह व्यवस्था गड़बड़ हो जाती है। मिट्टी सख्त हो जाती है और पानी सोखने की ताकत कम हो जाती है। बारिश का पानी सही से अंदर नहीं जा पाता और ऊपर से बह जाता है। सख्त मिट्टी में पौधों की जड़ें भी ठीक से नहीं फैल पातीं।मिट्टी कमजोर होने और कीड़े बढ़ने की वजह से फसल की क्वालिटी और मात्रा दोनों कम होने लगती हैं। किसान को पहले जितनी फसल पाने के लिए ज्यादा खाद और दवा डालनी पड़ती है जिससे खेती का खर्च बढ़ जाता है। कई बार इतना खर्च करने के बाद भी फसल पहले जैसी अच्छी नहीं मिल पाती।इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है हर साल अलग-अलग फसल उगाना। जैसे एक साल दाल वाली फसल लगाई जाए तो अगले साल कोई अनाज वाली फसल। इससे मिट्टी को हर बार कुछ नया मिलता रहता है और मिट्टी अच्छी बनी रहती है। दाल वाली फसलें मिट्टी को कुछ चीजें वापस भी देती हैं जिससे अगली फसल को फायदा मिलता है।
लगातार एक ही फसल लगाने से पोषक तत्वों का असंतुलन
हर फसल मिट्टी से पोषक तत्वों को अलग-अलग मात्रा में ग्रहण करती है। कुछ फसलों को नाइट्रोजन की अधिक जरूरत हो सकती है, जबकि कुछ फसलें मिट्टी से अन्य पोषक तत्वों का अपेक्षाकृत ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। यदि किसान वर्षों तक उसी फसल की खेती करता रहे, तो मिट्टी पर पोषक तत्वों की एक जैसी मांग लगातार बनी रहती है।
इसका असर धीरे-धीरे फसल की वृद्धि और उत्पादन पर दिखाई दे सकता है। शुरुआत में किसान को कोई बड़ा अंतर महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक एक जैसी खेती करने पर मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर पड़ सकती है। इसके बाद किसान को उत्पादन बनाए रखने के लिए खाद और अन्य कृषि इनपुट पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
कीट और रोगों का बढ़ सकता है खतरा
एक ही फसल को बार-बार उगाने का दूसरा बड़ा नुकसान कीट और रोगों से जुड़ा है। किसी खास फसल पर हमला करने वाले कुछ कीट और रोगजनक उसी फसल के खेत में बार-बार अनुकूल परिस्थितियां पा सकते हैं। फसल के अवशेषों में मौजूद कुछ रोगजनक या कीट अगले मौसम में फिर समस्या पैदा कर सकते हैं।
यदि किसान लगातार उसी फसल की खेती करता है तो कीट और रोग प्रबंधन अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई परिस्थितियों में किसान को अतिरिक्त नियंत्रण उपाय अपनाने पड़ते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है। इसलिए फसल विविधता और उचित फसल चक्र को कीट एवं रोग प्रबंधन की समग्र रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
खेती में अच्छी पैदावार केवल एक मौसम का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। किसान के लिए यह भी जरूरी है कि उसकी जमीन आने वाले वर्षों में भी उत्पादन देने में सक्षम बनी रहे। लगातार एक ही फसल उगाने के बजाय फसल चक्र और फसल विविधीकरण अपनाने से मिट्टी पर पड़ने वाला एकतरफा दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
