रांची। रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र आज विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। रविवार को राज्य मंत्रियों की विशेष कमेटी और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर में करीब पांच घंटे तक चली वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पूर्व घोषित विधानसभा घेराव पर आगे बढ़ने का फैसला लिया।छात्रों को सुबह 10 बजे से पहले पुरानी विधानसभा के पास जमा होने को कहा गया था। वहां से वे एकजुट होकर नई विधानसभा की ओर शांतिपूर्ण पैदल मार्च पर निकल पड़े। विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। नया विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई है।
सरकार का दावा है कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं। इनमें 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा और एसीएफ परीक्षा को रद्द करना, टीडीपीएल एजेंसी की परीक्षाओं की जांच कराना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाना शामिल है। हालांकि छात्र प्रतिनिधि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े रहे। जेएमएम मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सीजीएल परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी, इसलिए राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने या सीबीआई जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है।प्रदर्शनकारियों ने पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा तक के रास्ते में लगे छह बैरिकेड में से पहला बैरिकेड पार कर आगे बढ़ गए हैं। देवेंद्र नाथ मेहतो एंबुलेंस से विधानसभा के लिए रवाना हो गए हैं और बाकी छात्रों के साथ मार्च में शामिल होंगे। इस दौरान बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास का घेराव किया। कई नेताओं को हिरासत में लिया गया जिनमें प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू शामिल हैं।
पांच घंटे की वार्ता के बाद भी नहीं बनी बात
विधानसभा घेराव से पहले रविवार को राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष मंत्रिस्तरीय कमेटी और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई। करीब पांच घंटे तक चली इस वार्ता का उद्देश्य छात्रों की मांगों पर समाधान निकालना था। हालांकि, बातचीत किसी अंतिम सहमति तक नहीं पहुंच सकी।
सरकार की ओर से दावा किया गया कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कुछ परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की बात भी कही। लेकिन छात्र प्रतिनिधियों ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग को सबसे अहम बताया।
सरकार ने किन मांगों को माना?
राज्य सरकार का कहना है कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार किया जा चुका है। इनमें 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा और एसीएफ परीक्षा को रद्द करने से संबंधित मांगें शामिल हैं। इसके अलावा टीडीपीएल एजेंसी की ओर से आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की बात भी सरकार ने कही है।
सरकार का तर्क है कि इन कदमों के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं और उनके लिए परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सरकार द्वारा विशेषज्ञ समिति गठित करने का उद्देश्य भविष्य में परीक्षा संचालन से जुड़ी समस्याओं को कम करना बताया जा रहा है।
JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सबसे बड़ा गतिरोध
छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा मतभेद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों की मांग है कि इस परीक्षा को रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच कराई जाए।
वहीं झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इस मांग को लेकर अलग रुख सामने रखा। उनका कहना है कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी। ऐसे में राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने या सीबीआई जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
