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समाचार मिर्ची

आम को फलों का राजा कहा जाता है और भारत में यह फसल न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य बड़े पैमाने पर आम की खेती करते हैं। लेकिन अच्छी और बंपर पैदावार पाने के लिए सही समय पर उचित देखभाल जरूरी होती है। कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, फरवरी और मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए सबसे निर्णायक समय होता है।

इस कड़ी में बता दें कि, खाद और पोषक तत्व प्रबंधन इस समय पेड़ को मजबूत बनाने और फलधारण बढ़ाने के लिए अहम है। फरवरी-मार्च में संतुलित खाद दें। जैविक खाद जैसे अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद (50-100 किलो प्रति पेड़, उम्र के अनुसार), वर्मीकम्पोस्ट या नीम की खली का प्रयोग करें। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और पेड़ की जड़ों को मजबूत बनाती है। रासायनिक खाद में नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) का संतुलित मिश्रण दें। फूल आने से पहले नाइट्रोजन कम रखें, क्योंकि ज्यादा नाइट्रोजन से पत्तियां ज्यादा आती हैं और फूल कम।

कुल मिलाकर, फरवरी-मार्च में सिंचाई रोकना या कम करना, संतुलित खाद और सूक्ष्म पोषक तत्व देना, कीट-रोग से तुरंत बचाव और पेड़ की समग्र देखभाल से आम की पैदावार बंपर हो सकती है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि फलों की मिठास, आकार और बाजार मूल्य भी बेहतर होगा। किसानों को स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या बागवानी विभाग से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि मिट्टी, जलवायु और किस्म के अनुसार सलाह अलग-अलग हो सकती है।

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