मुंबई। महाराष्ट्र और भारतीय राजनीति के लिए 27 जनवरी 2026 एक बेहद दुखद और ऐतिहासिक दिन बन गया। राज्य के डिप्टी मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में निधन हो गया। इस हादसे ने महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ा दी है और उनके लाखों समर्थकों और पार्टी साथियों को गहरा सदमा पहुंचाया है।
अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर साल 1982 में राजनीति में कदम रखा. अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा…विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफरअजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे।
अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की छाया में राजनीति की बारीकियां सीखीं। वर्ष 1982 में अपने चाचा की प्रेरणा और मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। शुरुआती समय में अजित पवार ने बारामती क्षेत्र में स्थानीय राजनीति और युवा संगठन के माध्यम से अपनी पकड़ बनाई। उनकी शिक्षा के दौरान ही शरद पवार ने उन्हें राजनीति की बारीकियाँ सिखाई और छोटे-छोटे कदमों से शुरूआत कराकर उन्हें बड़े मंच तक पहुंचाया। धीरे-धीरे उन्होंने न केवल अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि खुद महाराष्ट्र के सियासी परिदृश्य में अपनी अलग पहचान बनाई।
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सफर
अजित पवार ने अपने लगभग 45 साल लंबे राजनीतिक जीवन में कई अहम पदों पर कार्य किया। वे एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे। उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य की राजनीति में स्थायित्व बनाए रखा।
यहां पर हम आपको यह भी बता दें कि, उनकी नीतिगत समझ और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें एनसीपी के शीर्ष नेताओं में स्थापित किया। डिप्टी सीएम के रूप में उनके योगदान को राज्य के कई विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों के साथ जोड़ा जाता है। अजित पवार की सियासी शैली में संयम, दूरदर्शिता और व्यावहारिक निर्णय क्षमता थी।
जानकारी दे दें कि, अजित पवार का निधन महाराष्ट्र और भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता और जनसेवा की प्रतिबद्धता ने उन्हें राज्य और पार्टी दोनों में अमूल्य बना दिया। यह हादसा न केवल उनके परिवार और पार्टी के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक बड़ा शोक है।
