मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला जब एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार तथा उनकी चचेरी बहन और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले पहली बार पार्टी विभाजन के बाद एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के लिए संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया।
इस घोषणा पत्र में नल से पानी की आपूर्ति, यातायात जाम कम करना, गड्ढामुक्त सड़कें, स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण, हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाएं, झुग्गी पुनर्वास योजना, पीएमपीएमएल बसों और मेट्रो में मुफ्त यात्रा सुविधा, 500 वर्ग फुट तक के मकानों पर संपत्ति कर माफी और छात्रों को मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराने जैसे वादे शामिल हैं।
जुलाई 2023 में अजीत पवार ने शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी छोड़कर एकनाथ शिंदे सरकार का हिस्सा बनने का फैसला किया था, जिसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी। इस साझा मंचन को दोनों धड़ों के बीच संबंधों में नरमी का संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन केवल नगर निगम चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आगे भी जारी रह सकता है। सुप्रिया सुले की मौजूदगी से यह स्पष्ट होता है कि एनसीपी (SP) और एनसीपी दोनों ही अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में नई संभावनाओं और समीकरणों की ओर इशारा माना जा रहा है, जो स्थानीय चुनावों के साथ-साथ भविष्य में राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
