नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की तुलना हिटलर के दौर से की और कहा कि प्राइवेट कपड़ों में लोग लाठी लेकर छात्रों को पीट रहे थे।
इस कड़ी में अखिलेश यादव ने कहा कि सोमवार को छात्रों और युवाओं के साथ जो व्यवहार हुआ, वैसा आजादी के बाद पहले कभी नहीं देखा गया। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों के सिर पर चोट आई, आंसू गैस के गोले चलाए गए और कुछ छात्रों की हड्डियां तक टूट गईं। उन्होंने दावा किया कि छात्र दूर-दूर से दिल्ली आए थे और उन्हें रास्ते की जानकारी भी नहीं थी।
इस संबंध में सपा प्रमुख ने नीट पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब तक 20 पेपर लीक हो चुके हैं और जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां पेपर लीक हो रहे हैं। अखिलेश यादव ने मंत्रियों के इस्तीफे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा दबाव इसलिए नहीं बना पा रही क्योंकि इस्तीफे से दबे राज खुल सकते हैं।उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि पार्टी इस सरकार के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। अखिलेश यादव ने सरकार से अपील की कि आंदोलनकारियों को हटाने के बजाय खुद कुर्सी छोड़ दी जाए।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर जताई नाराजगी
अखिलेश यादव ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई छात्र दूर-दराज के इलाकों से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों के सिर पर चोट लगी, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कुछ प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए।
हालांकि, इन दावों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग पक्ष भी सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
फिलहाल दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन और उस पर हुई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही, सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। वहीं छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से इस विषय पर आगे की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
