नई दिल्लीअक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी तिथि को भगवान परशुराम का अवतरण हुआ, मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ तथा पांडवों को अक्षय पात्र प्राप्त हुआ। बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी दिन खोले जाते हैं।
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद पांच राजयोग बन रहे हैं। साथ ही पंच महापुरुष योग का भी संयोग है। इनमें गजकेसरी योग, त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, शश योग, मालव्य योग और रवि योग शामिल हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार इन योगों से सुख-समृद्धि, निवेश में तीन गुना फल, कार्यों में सफलता, करियर में उन्नति और मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।
तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 07:27 बजे तक रहेगी। पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 10:49 से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। खरीदारी का शुभ समय 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 05:51 बजे तक है।इस अवसर पर मेष, वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों की किस्मत चमकने की संभावना बताई गई है। ग्रहों की यह स्थिति व्यापारियों के लिए नए निवेश और धन के अवसर प्रदान कर सकती है। अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी, पीतल के बर्तन, जमीन या वाहन जैसी शुभ वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ दिन माना जाता है, जिस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। “अक्षय” का अर्थ होता है – जो कभी क्षय न हो। इस दिन दान, पूजा, जप और तप करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी तिथि को भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। महाभारत काल में भी इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई।
इसके अलावा, उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी शुभ अवसर पर खोले जाते हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।
