Skip to main content

समाचार मिर्ची

नई दिल्लीअगस्त-सितंबर के महीने में कई किसान अपने खेतों को खाली छोड़ देते हैं। इस समय कुछ खास सब्जियां उगाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और खेत का बेहतर उपयोग कर मुनाफा कमा सकते हैं। यह समय मूली, गाजर, शलजम तथा पालक और धनिया जैसी पत्तेदार सब्जियों की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

बता दें कि, मूली की खेती उचित जल निकासी वाली जगह पर आसानी से की जा सकती है। इसकी कई किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं और बाजार में उचित कीमत मिल सकती है। पालक कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है। इसे पर्याप्त नमी वाले खेत में उगाया जा सकता है। किसान बाजार की मांग के अनुसार इसकी बुवाई का समय तय कर सकते हैं।

वही यह भी बताते चले कि, धनिया की मांग सालभर बनी रहती है। घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्तरां में भी इसकी मांग होती है। कम पानी और बेहतर जल निकासी वाले खेत में इसकी खेती अच्छी आमदनी दे सकती है। सितंबर में कई क्षेत्रों में गाजर की बुवाई शुरू हो जाती है। इसके लिए मिट्टी हल्की भुरभुरी होनी चाहिए। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार किस्म का चयन कर सकते हैं।

शलजम की खेती ठंड की ओर बढ़ते मौसम में की जाती है। इसके लिए खेत की मिट्टी को सही तरीके से तैयार करना होता है। जलभराव से बचाते हुए नियमित देखभाल से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। किसी भी सब्जी की खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच करें, जल निकासी का ध्यान रखें तथा क्षेत्र की जलवायु, वातावरण और बाजार की मांग को ध्यान में रखें।

मूली की खेती से कम समय में उत्पादन

मूली ऐसी सब्जी है जिसकी कई किस्में अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाती हैं। यही वजह है कि किसान इसे ऐसी अवधि में लगा सकते हैं जब खेत में लंबे समय वाली फसल की जगह उपलब्ध न हो।

मूली की खेती के लिए खेत में उचित जल निकासी होना जरूरी है। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से जड़ वाली फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करना और अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है।

पालक की खेती भी हो सकती है फायदे का सौदा

पालक कम अवधि में तैयार होने वाली प्रमुख पत्तेदार सब्जियों में शामिल है। इसकी मांग घरों के साथ-साथ स्थानीय सब्जी बाजारों में भी बनी रहती है। किसान इसे पर्याप्त नमी वाली जमीन में उगा सकते हैं।

पालक की खेती में मिट्टी में उचित नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। किसान सिंचाई की मात्रा स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय कर सकते हैं।

पालक की एक खास बात यह है कि किसान बाजार की मांग के अनुसार बुवाई का समय निर्धारित कर सकते हैं। जहां स्थानीय बाजार में ताजी पत्तेदार सब्जियों की नियमित मांग रहती है, वहां पालक किसानों के लिए कम अवधि में आय देने वाली फसल का विकल्प बन सकता है।

धनिया की मांग सालभर

धनिया भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी मांग सालभर बनी रहती है। घरों में इस्तेमाल के अलावा होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य व्यवसायों में भी हरे धनिये की जरूरत रहती है। इस कारण किसान बाजार के आसपास होने पर इसकी खेती से बिक्री का अच्छा अवसर तलाश सकते हैं।

धनिया की खेती के लिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। बहुत अधिक पानी जमा होने से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, पर्याप्त नमी बनाए रखना भी जरूरी है। इसलिए किसान को मिट्टी और मौसम की स्थिति के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए।

सितंबर में गाजर की बुवाई पर कर सकते हैं विचार

कई क्षेत्रों में सितंबर के आसपास गाजर की बुवाई शुरू की जाती है। गाजर जड़ वाली सब्जी है और इसके अच्छे विकास के लिए मिट्टी की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए हल्की और भुरभुरी मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है, ताकि जड़ को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

कठोर या बहुत अधिक चिपचिपी मिट्टी में जड़ का विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई और मिट्टी की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।

सब्जी की खेती से पहले मिट्टी की जांच जरूरी

किसी भी सब्जी की खेती शुरू करने से पहले किसान को मिट्टी की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। मृदा परीक्षण से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके आधार पर खेत में पोषक तत्वों का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

मिट्टी की जांच के अलावा खेत की जल निकासी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। अगस्त-सितंबर में कई क्षेत्रों में बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। ऐसे में यदि खेत में पानी जमा हो जाता है तो सब्जियों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

किसानों के लिए सबसे बेहतर रणनीति यही होगी कि वे बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं, जल निकासी की व्यवस्था देखें और स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म तथा बुवाई समय की जानकारी लें। सही फसल का चयन और बेहतर प्रबंधन खेत के खाली समय का उपयोग करने के साथ-साथ खेती से मिलने वाली संभावित आमदनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version