प्रयागराज।इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज एक अहम कानूनी सुनवाई प्रस्तावित है, जिस पर पूरे प्रदेश और देश की नजरें टिकी हुई हैं। कोर्ट नंबर-72 में सीरियल नंबर-142 पर सूचीबद्ध इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। यह सुनवाई इस कारण भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मामला संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है और अदालत पहले ही इसे गंभीर प्रकृति का बताते हुए पुलिस को औपचारिक एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दे चुकी है।
जानकारी के लिए बतादे कि, मामले की शुरुआत प्रयागराज में माघ मेले और महाकुंभ-2025 के दौरान हुई शिकायतों से हुई। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (जिन्हें आशुतोष महाराज या आशुतोष पांडेय भी कहा जाता है) ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने एक संगठित तरीके से नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। आरोप है कि राजस्थान, बिहार और अन्य राज्यों से लाए गए बटुकों को गुरु दीक्षा के नाम पर उनके समक्ष पेश किया जाता था, जहां अनुचित कृत्य होते थे। विरोध करने पर धमकियां दी जाती थीं।
मामले की शुरुआत प्रयागराज में माघ मेले और महाकुंभ-2025 के दौरान हुई शिकायतों से हुई। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (जिन्हें आशुतोष महाराज या आशुतोष पांडेय भी कहा जाता है) ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने एक संगठित तरीके से नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। आरोप है कि राजस्थान, बिहार और अन्य राज्यों से लाए गए बटुकों को गुरु दीक्षा के नाम पर उनके समक्ष पेश किया जाता था, जहां अनुचित कृत्य होते थे। विरोध करने पर धमकियां दी जाती थीं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें निराधार, झूठा और बदनामी की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले बच्चे उनके संस्थान से जुड़े भी नहीं हैं और यह धार्मिक या राजनीतिक मकसद से प्रेरित है। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने का वादा किया है और न्यायपालिका पर भरोसा जताया है।
यह मामला धार्मिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा, गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता और मीडिया ट्रायल जैसे मुद्दों को उजागर करता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में एक प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने गो रक्षा और अन्य धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। आरोपों के बाद उनके शिष्यों और अनुयायियों में रोष है, जबकि पीड़ितों के पक्ष में आवाजें भी उठ रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट का आज का फैसला इस संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
