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अयोध्या। अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर 27 मार्च 2026 को राम जन्मोत्सव मनाया गया। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक हुआ। इसमें 9 मिनट तक भगवान रामलला के ललाट पर नीली किरणें पड़ीं। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा सूर्य तिलक था।सूर्य तिलक से पहले रामलला का पंचामृत से अभिषेक किया गया। रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया। साथ ही सोने का मुकुट और हार भी पहनाया गया। गर्भगृह को फूलों से सजाया गया। 14 पुजारियों ने गर्भगृह में विशेष पूजा और आरती की। सूर्य तिलक के बाद पट कुछ देर के लिए बंद किया गया और फिर 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया गया।

अयोध्या में राम जन्मोत्सव के लिए करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। राम जन्मभूमि परिसर, राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें लगी रहीं। दर्शन का समय बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया, जो सामान्य दिनों से 3 घंटे अधिक है। सुबह 5:30 बजे रामलला की आरती भी की गई।सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया था, जिसमें 4 लेंस और 4 मिरर लगाए गए थे। इस व्यवस्था से किरणें गर्भगृह तक पहुंचाई गईं।

पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार

सूर्य तिलक से पहले रामलला का विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक के बाद भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया। रामलला को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया, साथ ही सोने का मुकुट और आकर्षक हार धारण कराया गया। गर्भगृह को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस दौरान 14 पुजारियों ने गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न की। वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालु इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए उत्सुक दिखाई दिए।

सूर्य तिलक की अद्भुत तकनीक

रामलला के सूर्य तिलक के लिए इस बार अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया। अष्टधातु के 20 पाइपों से करीब 65 फीट लंबा विशेष सिस्टम तैयार किया गया था। इस प्रणाली में 4 लेंस और 4 मिरर लगाए गए थे, जिनकी सहायता से सूर्य की किरणों को सटीक कोण पर गर्भगृह तक पहुंचाया गया।

यह तकनीक पारंपरिक आस्था और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने इस व्यवस्था को इस प्रकार डिजाइन किया कि सूर्य की किरणें ठीक निर्धारित समय पर भगवान के ललाट पर पड़ें।

अयोध्या में आयोजित यह राम जन्मोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का अद्भुत उदाहरण भी बना। सूर्य तिलक का दिव्य दृश्य, भव्य पूजा-अर्चना और लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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