नई दिल्ली।बरसात के मौसम में उमस और लगातार बारिश के कारण सब्जियों के पौधों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से कबरा रोग, जिसे मोजेक वायरस भी कहा जाता है, लौकी, तोरई, कद्दू, टमाटर और मिर्च जैसी बेल वाली या नाजुक सब्जियों पर तेजी से असर करता है। समय पर ध्यान न देने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
इस रोग की शुरुआत पत्तियों पर छोटे-छोटे सफेद या हल्के पीले धब्बों से होती है। धीरे-धीरे ये धब्बे बड़े होकर पत्तियों को चितकबरी बना देते हैं। आगे बढ़ने पर धब्बे लाल या भूरे हो जाते हैं, पत्तियां सूखकर मुड़ने लगती हैं और पौधे की ग्रोथ रुक जाती है। फलों तक पहुंचने पर सब्जियां टेढ़ी-मेढ़ी और बिकने लायक नहीं रहतीं।
इस संबंध में कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बीमारी से बचाव के लिए घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं। ताजे मट्ठे को तांबे के बर्तन में 4-5 दिन रखकर खट्टा होने दें और फिर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करें। साथ ही, नीम के तेल में थोड़ा लिक्विड सोप मिलाकर पत्तियों के ऊपर और नीचे स्प्रे करने से रोग फैलाने वाले कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है।नियमित रूप से पौधों का निरीक्षण कर शुरुआती लक्षणों पर सतर्क रहने से किसान अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।
किन सब्जियों में अधिक होता है खतरा?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, करेला जैसी बेल वाली सब्जियों के अलावा टमाटर और मिर्च जैसी नाजुक फसलें भी कबरा रोग की चपेट में जल्दी आ सकती हैं। लगातार बारिश, अधिक नमी, खेत में पानी का जमाव और उमस भरा वातावरण वायरस और उसे फैलाने वाले कीटों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।
ऐसी परिस्थितियों में यदि खेत की नियमित निगरानी नहीं की जाए तो बीमारी तेजी से एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैल सकती है। इसलिए किसानों को मानसून के दौरान अपनी सब्जी की फसल का रोजाना निरीक्षण करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को सप्ताह में कई बार पौधों का निरीक्षण करना चाहिए। यदि किसी पौधे में पत्तियों का रंग बदलना, धब्बे बनना या पत्तियों का मुड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उचित कदम उठाना चाहिए।
