कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के साथ माकपा कार्यकर्ताओं में असामान्य उत्साह देखा गया। सोमवार को कोलकाता से लेकर विभिन्न जिलों तक पार्टी दफ्तरों में भीड़, नारेबाजी और जश्न का माहौल रहा। यह जश्न भाजपा की जीत का नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन में बदलाव का संकेत था।
jagran.comदोपहर में भाजपा की जीत के रुझान स्पष्ट होते ही माकपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा बढ़ने लगा। पार्टी को इस चुनाव में मात्र एक सीट मिली है, लेकिन कार्यकर्ता और नेता इसे मनोवैज्ञानिक वापसी का मौका मान रहे हैं। पिछले एक दशक से बंगाल की राजनीति तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट गई थी, जिसमें वामपंथी दल हाशिये पर चला गया था।
माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह जश्न किसी की हार-जीत का नहीं, बल्कि उस माहौल के टूटने का है जिसमें वाम राजनीति को समाप्त मान लिया गया था। विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की जीत और तृणमूल कांग्रेस की कमजोर स्थिति वाम दलों के लिए नई राजनीतिक जगह खोल सकती है।सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष की भूमिका में वाम दल अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश करेंगे। यह बंगाल की राजनीति में तीसरे खिलाड़ी की वापसी की संभावना को दर्शाता है। बता दें कि ममता बनर्जी ने 2011 में माकपा के 34 वर्षों के शासन को समाप्त कर सत्ता हासिल की थी।
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