कोलकाता।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पैक) को टीएमसी का गुप्त धन जुटाने का अड्डा करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने रविवार (11 जनवरी 2026) को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दो दिन पहले कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी द्वारा आई-पैक के परिसर से फाइलें जबरदस्ती ले जाने की घटना से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “ममता बनर्जी कह रही हैं कि आई-पैक उनकी राजनीतिक परामर्श फर्म है। लेकिन इसके आसपास की संदिग्ध परिस्थितियां कई सवाल पैदा करती हैं कि क्या यह वाकई राजनीतिक परामर्श फर्म है या टीएमसी का गुप्त धन जुटाने का अड्डा।” उन्होंने ईडी की छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस प्रमुख की उपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल का पूरा पुलिस तंत्र ममता बनर्जी के हाथों की कठपुतली बन गया है।
गौरतलब हैं कि, यह पूरा विवाद शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को ईडी द्वारा की गई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी ने कोलकाता में 6 स्थानों और दिल्ली में 4 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 2020 में दर्ज एक मामले के तहत की गई, जिसमें अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले कोयला तस्करी गिरोह के खिलाफ जांच चल रही है। ईडी के अनुसार, इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं, और आई-पैक के परिसर को इस जांच के दायरे में शामिल किया गया था। छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी खुद आई-पैक के दफ्तर पहुंचीं और वहां से कुछ फाइलें लेकर चली गईं, जिसे भाजपा ने “डर का प्रमाण” बताया है।
जानकारी दे दें कि, भाजपा ने इस मुद्दे को टीएमसी की कमजोरी के रूप में पेश किया है। प्रसाद ने कहा कि गोवा चुनाव, आसनसोल कोयला सिंडिकेट, श्री मांझी जैसे मुद्दों पर मीडिया में चर्चा हो रही है, और ये सब बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी डरी हुई हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर भाजपा और भी पर्दाफाश करेगी।
बता दें कि, यह विवाद लोकसभा चुनावों के करीब आते हुए महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है, और कोयला घोटाला जैसे मुद्दे भाजपा को हमलावर बनाने का मौका दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईडी की जांच से कोई ठोस सबूत मिले, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा झटका हो सकता है। वहीं, ममता बनर्जी की छवि एक मजबूत नेता की है, जो केंद्र की कार्रवाइयों का मुकाबला करती हैं, जो उनके वोट बैंक को मजबूत रख सकती है।
कुल मिलाकर, भाजपा का यह हमला पश्चिम बंगाल की राजनीति को गर्मा रहा है। आई-पैक के मामले से जुड़ी जांच आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि दोनों पार्टियां चुनावी मैदान में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार कर रही हैं।
