लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में दो मुस्लिम चेहरों को शामिल किया है। तारिक मंसूर को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुंवर बासित अली को पदोन्नत कर अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। दोनों नेता उत्तर प्रदेश से हैं और पश्चिमी यूपी से उनका संबंध है।
जानकारी दे दें कि, कुंवर बासित अली मुस्लिम राजपूत हैं और मेरठ से आते हैं। उन्होंने बीजेपी में जमीनी कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत कर शीर्ष तक पहुंच बनाई है। तारिक मंसूर अलीगढ़ के रहने वाले हैं और कुरैशी समाज से आते हैं। वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति हैं और सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए। दोनों की नियुक्ति से बीजेपी अशराफ और पसमांदा का संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि पश्चिमी यूपी में मुस्लिम राजपूत और कुरैशी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
वही यह भी बताते चले कि, बीजेपी का लक्ष्य सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काउंटर करना और मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाना है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सीएसडीएस के अनुसार 87 प्रतिशत मुस्लिम वोट इंडिया गठबंधन को मिले थे। उस चुनाव में बीजेपी की सीटें घटकर 33 रह गई थीं, जबकि सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। बासित अली ने उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सदस्यता अभियान, चौपाल, संवाद कार्यक्रम और मदरसों में योग शिविर आयोजित किए थे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार भी किया। 2025 में उनके नेतृत्व में पसमांदा मुस्लिमों के मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बीजेपी 2022 से ही पसमांदा मुस्लिमों पर फोकस कर रही है और योगी कैबिनेट में दानिश आजाद अंसारी को शामिल किया गया था।
अंत में बता दें कि, उत्तर प्रदेश में लगभग 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जबकि पश्चिमी यूपी में यह 30 से 50 प्रतिशत तक है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 143 सीटों पर मुस्लिम मतदाता प्रभाव रखते हैं। इनमें 43 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम उम्मीदवार जीत सकते हैं। बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, कैराना, बुलंदशहर, अलीगढ़, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम राजपूत और कुरैशी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। बीजेपी इन दोनों नेताओं के जरिए पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में संवाद बढ़ाने और 2027 के चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
