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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘ना खेला होबे’ की रणनीति अपनाई है। यह रणनीति राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘खेला होबे’ नारे का मुकाबला करने के लिए बनाई गई है। पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में अच्छे माहौल के बावजूद केवल 38 प्रतिशत वोट और 77 सीटें हासिल कर पाई थी, जबकि सरकार बनाने की उम्मीद थी। इस बार पार्टी ने पिछले डेढ़ साल से विभिन्न स्तर पर जांच अभियान चलाए हैं ताकि पिछली हार के कारणों को दूर किया जा सके।

भाजपा ने राज्य की सभी 292 सीटों पर हार-जीत का मूल्यांकन करवाया है। दिल्ली और अन्य राज्यों से आई टीमों ने जमीनी स्तर पर कमजोर कड़ियों की पहचान की, जिसमें जीते हुए क्षेत्रों में भाजपा विधायकों की कमी और हारे हुए क्षेत्रों में टीएमसी की मजबूती शामिल है। इन रिपोर्टों को राज्य संगठन प्रभारी सुनील बंसल के माध्यम से दिल्ली की आला कमान तक पहुंचाया गया है। पार्टी का मास्टरप्लान टिकट बंटवारे से लेकर फर्जी वोटों पर नजर रखने तक फैला हुआ है।

टिकट वितरण में इस बार जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दी जाएगी। हाल में भाजपा में शामिल हुए लोगों पर कम भरोसा किया जाएगा, क्योंकि पार्टी का मानना है कि टीएमसी का मजबूत कैडर पहले की तरह नुकसान पहुंचा सकता है। स्थानीय नेताओं को एक साल पहले विभिन्न विधानसभाओं में भेजकर जमीन तैयार की जा रही है। मूल्यांकन टीम ने सुझाव दिए हैं कि टिकट में स्थानीय नेताओं की भागीदारी बढ़ाई जाए, महिलाओं और मतदाताओं के लिए विशेष घोषणाएं की जाएं तथा उद्योग जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाए। एसआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में फर्जी वोट कट गए हैं, जिसका सीधा फायदा टीएमसी को मिलता था और अब चुनाव में इसका असर दिखेगा।

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