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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी चुनावी रणनीति को और मजबूत करते हुए 19 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वह है आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित रेप केस की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का। पार्टी ने उन्हें पानीहाटी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 19 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की है. पार्टी ने पानीहाटी सीट से आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को…पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 19 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की है। पार्टी ने पानीहाटी सीट से आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को…पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी है।

बीजेपी की तीसरी सूची में शामिल अन्य उम्मीदवार भी विभिन्न क्षेत्रों से चुने गए हैं, जिनमें कई नए चेहरे और कुछ अनुभवी नेता शामिल हैं। पार्टी ने युवाओं और महिलाओं को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। यह रणनीति इस बात का संकेत देती है कि बीजेपी राज्य में एक व्यापक सामाजिक आधार तैयार करना चाहती है।

दूसरी ओर, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने बीजेपी के इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। टीएमसी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि पीड़ित परिवार को चुनावी मैदान में उतारना एक तरह से सहानुभूति बटोरने की राजनीति है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह न्याय और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है और इसी उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम जनता की नजरें अब चुनावी मुकाबले पर टिकी हुई हैं। रत्ना देबनाथ जैसे उम्मीदवारों की एंट्री से चुनावी माहौल और अधिक भावनात्मक और मुद्दा-आधारित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी का यह दांव कितना असरदार साबित होता है और क्या यह उसे चुनाव में बढ़त दिला पाता है।

कुल मिलाकर, बीजेपी की तीसरी सूची और उसमें रत्ना देबनाथ को टिकट देने का फैसला पश्चिम बंगाल चुनाव को एक नया मोड़ देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि सामाजिक संदेश देने की भी एक कोशिश है, जिसका असर चुनावी नतीजों पर देखने को मिल सकता है।

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