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मुंबई। साल 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शुमार ‘बॉर्डर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और पहले ही दिन से यह फिल्म दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। करीब 30 साल पहले आई 1997 की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ ने जिस तरह देशभक्ति, बलिदान और भारतीय सैनिकों के साहस को बड़े पर्दे पर अमर कर दिया था, उसी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश ‘बॉर्डर 2’ में साफ नजर आती है। खास बात यह है कि इस बार भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं सनी देओल, जो तीन दशक बाद उसी जज्बे और गरजती आवाज के साथ वापसी करते दिखाई देते हैं।

‘बॉर्डर’ की विरासत और दर्शकों की उम्मीदें

‘बॉर्डर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावना थी। उस दौर में यह फिल्म देशभक्ति सिनेमा की पहचान बन गई थी। “ये धरती मेरी मां है” जैसे संवाद और सैनिकों की कुर्बानी ने एक पूरी पीढ़ी को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया था। ऐसे में जब ‘बॉर्डर 2’ की घोषणा हुई, तो दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से बहुत ऊंची थीं। फिल्म का सबसे बड़ा चैलेंज यही था कि वह पुरानी यादों को ताजा रखते हुए आज के दर्शकों से कैसे जुड़े। मुंबई

साल 2026 की सबसे मच अवेटेड फिल्मों में से एक ‘बॉर्डर 2’ इस शुक्रवार को रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म के साथ बॉलीवुड स्टार सनी देओल…करीब 30 साल पहले आई ‘बॉर्डर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी. कम से कम एक पूरी जेनरेशन के लिए ‘बॉर्डर’ देशभक्ति का इमोशन रही है। ‘बॉर्डर 2’ की सबसे बड़ी ताकत इसका इमोशनल कनेक्ट है। सैनिकों और उनके परिवारों के बीच के रिश्ते, मां-बाप की चिंता, पत्नी का इंतजार और बच्चों की मासूम उम्मीदें—ये सब फिल्म को सिर्फ एक युद्ध ड्रामा नहीं रहने देते, बल्कि एक मानवीय कहानी बनाते हैं। फिल्म बार-बार यह याद दिलाती है कि सीमा पर तैनात सैनिक सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि आम इंसान भी हैं, जो हर दिन जान जोखिम में डालते हैं।

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