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समाचार मिर्ची

भारत में BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में हो रहा है। यह भारत की चौथी अध्यक्षता है और इस बार का थीम है “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में वैश्विक शासन, आर्थिक सहयोग और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

इस बार BRICS का विस्तार हुआ है और इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं — ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। इसके साथ ही 10 साझेदार देशों को भी आमंत्रित किया गया है — बेलारूस, क्यूबा, बोलिविया, कज़ाख़स्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, WTO प्रमुख और WHO प्रमुख भी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

पहले दिन यानी 12 सितंबर को दोपहर में बंद-द्वार सत्र होगा, उसके बाद Bharat Innovates Exhibition का दौरा, परिवारिक फोटो और वृक्षारोपण कार्यक्रम होगा। शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गाला डिनर का आयोजन किया जाएगा। दूसरे दिन यानी 13 सितंबर को साझेदार देशों का आगमन, समूह फोटो और खुला सत्र होगा, जिसमें Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability पर चर्चा होगी। अंत में New Delhi Declaration जारी किया जाएगा।

दिल्ली में सुरक्षा और इंतज़ाम अभूतपूर्व हैं। लगभग 15,000 पुलिसकर्मी और 200 पैरामिलिट्री कंपनियाँ तैनात की गई हैं। NSG और SPG की संयुक्त निगरानी में राजधानी को बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए 35 प्रमुख मार्गों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं और मेट्रो सेवाएँ रविवार को सुबह 6 बजे से शुरू होंगी। एयरपोर्ट पर विशेष immigration counters और विमान पार्किंग की व्यवस्था की गई है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए ITC Maurya, Taj Palace और Leela Palace जैसे होटलों में ठहरने की व्यवस्था की गई है।

इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा वैश्विक शासन और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देना, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता पर ठोस कदम उठाना है।

भारत के लिए यह सम्मेलन एक बड़ा अवसर है, जहाँ वह “Global South” की आवाज़ को मजबूत कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। नई दिल्ली घोषणा से सदस्य देशों के साझा संकल्प और भविष्य की दिशा तय होगी।

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