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समाचार मिर्ची

मोहखेड़।। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर ग्राम धरमपुर निवासी पंढरी खरपुसे के निवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में कथावाचक पंडित डॉ. श्री नरेन्द्र तिवारी जी ने शुकदेव जी के प्राकट्य, राजा परीक्षित के प्रश्नों एवं भागवत महात्म्य के समापन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने आत्मा और परमात्मा के गूढ़ संबंध, भक्ति की महिमा तथा संसार की नश्वरता को सरल शब्दों में समझाते हुए ज्ञान और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा में बताया गया कि भगवान के परम भक्त शुकदेव जी, जो सदैव परमात्मा के ध्यान में लीन रहते हैं, राजा परीक्षित को ब्रह्मज्ञान की ओर प्रेरित करते हैं।

राजा परीक्षित, जिन्हें सात दिन में मृत्यु का श्राप प्राप्त था, उन्होंने शुकदेव जी से प्रश्न किया कि जीवन के अंतिम समय में मनुष्य को क्या करना चाहिए। इस पर शुकदेव जी ने भागवत कथा को ही मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग बताते हुए कहा कि यही आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है और सभी दुखों का अंत करती है।

इस अवसर पर भक्ति एवं ज्ञान का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को सांसारिक मोह-माया त्यागकर भगवान की शरण में जाने की प्रेरणा दी गई। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित मधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम के अंत में न्यू हनुमान मंदिर समिति, धरमपुर के सदस्यों द्वारा पंडित डॉ. नरेन्द्र तिवारी जी का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर चंदू खौशी, ओपी पवार, अनिल खौशी, अजय खौशी, तपेश पवार, प्रवीण पवार, रामस्वरूप पवार, राजा पवार, विजय पवार, अंकित खौशी, परमानंद खौशी, योगेश पवार एवं पुरुषोत्तम पाठे सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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