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छिंदवाड़ा। मोहखेड़ और आसपास के इलाकों में इन दिनों एक छोटा-सा एयरक्राफ्ट लगातार चक्कर काट रहा है। ग्रामीणों को ये बात समझ नहीं आ रही थी कि आखिर हो क्या रहा है। ग्रामीणों को लग रहा था कि सरकार फसलों का जायजा ले रही है मगर मामला कुछ और ही निकलकर सामने आया है। पिछले करीब एक महीने से यह मिनी एयरोप्लेन रडार की मदद से जमीन के नीचे छिपे प्लेटिनियम और सोने जैसे मूल्यवान खनिजों की खोज कर रहा है।

यह सर्वे केंद्र सरकार के खान मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास (एनएमईडीसी) की ओर से कराया जा रहा है। मोहखेड़ से शुरू होकर उमरेट और पांढुर्णा जिले के कुछ हिस्सों तक फैला यह प्रोजेक्ट लगभग 660 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर कर रहा है। प्लेन दिन में कई बार उड़ान भरता है और ग्रामीणों के लिए यह अब रोजमर्रा का नजारा बन चुका है।

सोने से महंगी है प्लेटिनियम

प्लेटिनियम एक ऐसी धातु है जो सोने से भी कहीं ज्यादा दुर्लभ और महंगी मानी जाती है। यह ज्यादातर गहराई में मिलती है और दूसरे खनिजों के साथ मिश्रित रहती है। कारों के कैटालिटिक कन्वर्टर, हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी और कई हाई-टेक इंडस्ट्रीज में इसकी भारी मांग है, लेकिन भारत में अभी इसकी खानें बहुत कम हैं। अगर यहां अच्छी मात्रा में प्लेटिनियम या सोना मिल जाता है तो यह क्षेत्र बड़े खनन प्रोजेक्ट का केंद्र बन सकता है।

मोहखेड़ के उमरेट में चल रहा है विरोध

स्थानीय लोग पहले भी कई बार ऐसे सर्वे का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि अगर खदान निकली तो खेती-बाड़ी, पानी और जंगल सब प्रभावित होंगे। कुछ महीने पहले भी इसी इलाके उमरेट में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य धातुओं की खोज हुई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने विरोध जताया था। अब फिर वही डर सता रहा है कि सर्वे के बाद जमीन अधिग्रहण शुरू हो जाएगा।

सर्वे पूरी तरह एरियल है। मिनी एयरोप्लेन से रडार इमेजिंग के जरिए जमीन के अंदर की परतों का अध्ययन किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले कुछ महीनों तक यह काम चलता रहेगा। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो आगे ड्रिलिंग और विस्तृत जांच शुरू होगी।

फिलहाल मोहखेड़ के आसमान में यह छोटा प्लेन उड़ रहा है और जमीन के नीचे क्या छिपा है, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। लेकिन ग्रामीणों की नजरें अब सिर्फ फसल पर नहीं, बल्कि आसमान पर भी टिकी हुई हैं। इतना ही नहीं अपने भविष्य को लेकर चिंतित भी नजर आ रहे हैं और कह रहे हैं कि कुछ मिलता भी है तो हम अपनी पुश्तैनी जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने वाले।

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