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नई दिल्ली।ICAR-CAZRI बीकानेर की पहल के तहत नाबार्ड के सहयोग से “सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली” पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को 1,000 सहजन के पौधे निःशुल्क प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान के किसानों को कम पानी वाली बहुउपयोगी फसल की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।

यहां हम आपको बता दें कि, प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि सहजन शुष्क जलवायु में अच्छी पैदावार देती है। इसकी पत्तियां, फलियां, फूल और बीज उपयोगी हैं तथा इसे ‘सुपर फूड’ भी कहा जाता है। सहजन का उपयोग आहार, पशु चारे, औषधि और उद्योगों में होता है, जिससे किसानों को एक फसल से कई आय के स्रोत मिल सकते हैं। केंद्रीय मूंगफली अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने किसानों से इस मॉडल को अपनाने की अपील की।

आखिर में बताते चले कि, CAZRI के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि का माध्यम बन सकता है। अगस्त माह में दो और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बी.एल. बिश्नोई के अनुसार, पहले चरण में बीकानेर जिले के करीब 30 किसान शामिल हैं। नाबार्ड की इस परियोजना के तहत जिले के 300 किसानों को 3 लाख से अधिक पौधे वितरित करने का लक्ष्य है।प्रशिक्षण में पौधरोपण, देखभाल, मूल्य संवर्धन और विपणन की जानकारी दी जा रही है। इससे किसानों की शुरुआती लागत कम होगी और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे।

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