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समाचार मिर्ची

भोपाल/विशेष संवाददाता: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। इस पावन अवसर पर आज धनतेरस (Dhanteras) का पर्व परंपरागत उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन को आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और खरीदारी से पूरे वर्ष घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास रहता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त (Dhanteras Puja Muhurat)

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, धनतेरस के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना सबसे फलदायी होता है।

  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 05:40 बजे से रात 08:15 बजे तक रहेगा।
  • वृषभ लग्न (विशेष खरीदारी और स्थिर लक्ष्मी पूजन के लिए): शाम 06:15 बजे से रात 08:10 बजे तक।

क्यों मनाया जाता है धनतेरस? (पौराणिक मान्यता)

सनातन संस्कृति में धनतेरस से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं:

  1. भगवान धन्वंतरि का प्रकट होना:पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। चूंकि वे आयुर्वेद और स्वास्थ्य के जनक माने जाते हैं, इसलिए इस दिन को ‘धनत्रयोदशी’ या ‘धन्वंतरि जयंती’ के रूप में भी मनाया जाता है।
  2. कुबेर देव और मां लक्ष्मी की उत्पत्ति:इसी पावन तिथि पर धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था। इस दिन विधि-विधान से इनकी पूजा करने से व्यक्ति को कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।
  3. राजा हिमा के पुत्र की कथा:एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा हिमा के पुत्र के भाग्य में विवाह के चौथे दिन सर्प डंसने से मृत्यु का योग था। उनकी पत्नी ने अनहोनी को टालने के लिए मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और दीपों का ढेर लगा दिया और पूरी रात भजन-कीर्तन करती रहीं। यमराज जब सर्प रूप में आए, तो दीपों की तेज चमक और सोने की चकाचौंध से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे अंदर प्रवेश नहीं कर सके। इस तरह राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से इस दिन ‘यम दीपदान’ और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई।

धनतेरस पर खरीदारी का विशेष महत्व

इस दिन पारंपरिक रूप से सोने, चांदी, बर्तन और नए आभूषण खरीदने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जिस वस्तु की भी खरीदारी की जाती है, उसमें 13 गुना वृद्धि होती है। इसके अलावा, इस दिन पारंपरिक रूप से झाड़ू खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है, जिसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।

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