कोलकाता। एग्जिट पोल चुनावी सर्वेक्षण का एक रूप है, जो मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद तैयार किया जाता है। इसमें समाचार चैनल या सर्वे एजेंसियां मतदाताओं से सीधे बातचीत करती हैं। मतदान केंद्र से बाहर निकलने वाले मतदाताओं से उनके राजनीतिक रुझान, पसंद-नापसंद, मुद्दों और मतदान प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में पूछा जाता है।
एग्जिट पोल की तैयारी सर्वे एजेंसियों और समाचार चैनलों के सहयोग से होती है। रिपोर्टर या एजेंसी के कर्मचारी मतदान केंद्रों पर मतदाताओं से बात करके डेटा इकट्ठा करते हैं। इस डेटा के आधार पर चुनावी नतीजों का अनुमान लगाया जाता है। सैंपल साइज आमतौर पर 30 हजार से लेकर एक लाख मतदाताओं तक रखा जाता है।एग्जिट पोल की सटीकता अलग-अलग रही है। कभी-कभी ये वास्तविक परिणामों से काफी करीब या मिलते-जुलते होते हैं, तो कुछ मामलों में पूरी तरह उलट भी जाते हैं। उदाहरण के तौर पर बिहार विधानसभा चुनावों में एग्जिट पोल के मुताबिक नतीजे नहीं आए और एनडीए को अपेक्षा से कहीं ज्यादा सीटें मिलीं।
चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल के प्रसारण पर पाबंदी लगाई हुई है। 9 अप्रैल 2026 सुबह 7 बजे से 29 अप्रैल 2026 शाम 6:30 बजे तक इनके प्रसारण की अनुमति नहीं है। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के बाद टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल दिखाए जाने शुरू हो जाते हैं।
अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि एग्जिट पोल चुनावी प्रक्रिया का एक रोचक और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनकी सीमाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। यह केवल अनुमान होते हैं, जिनकी सटीकता कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए, अंतिम परिणाम आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए।
