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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान के नतीजे सामने आ गए हैं। भाजपा उम्मीदवार देबांशू पांडा ने 1.09 लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की है। टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान की जमानत जब्त हो गई।जहांगीर खान अभिषेक बनर्जी के राइट हैंड मैन माने जाते हैं। उन्होंने आखिरी समय में मुकाबले से खुद को अलग कर लिया और अपना वोट भी नहीं डाला। फलता सीट अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र ने अभिषेक बनर्जी को 1.68 लाख वोटों की लीड दी थी, जहां उनका वोट शेयर लगभग 89 प्रतिशत था।

इस उपचुनाव में टीएमसी का वोट शेयर घटकर 3.7 प्रतिशत रह गया और पार्टी उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहा। फलता दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है, जो टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता था।भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार की तुलना में फलता का नतीजा टीएमसी के संगठन की जमीनी कमजोरी को उजागर करता है। यह हार अभिषेक बनर्जी के ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर भी सवाल उठाती है।

भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त

फलता सीट पर भाजपा की जीत केवल सांकेतिक नहीं बल्कि बेहद निर्णायक रही। 1.09 लाख वोटों का अंतर पश्चिम बंगाल की राजनीति में असामान्य माना जा रहा है। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि मतदाताओं ने इस बार टीएमसी के खिलाफ खुलकर मतदान किया।

भाजपा उम्मीदवार देबांशू पांडा ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और मतगणना के लगभग हर राउंड में टीएमसी पीछे दिखाई दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यह परिणाम भाजपा के बढ़ते जनाधार और टीएमसी विरोधी माहौल को दर्शाता है।

फलता उपचुनाव का असर आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दिखाई दे सकता है। भाजपा इस जीत को राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा बनाकर पेश करेगी, जबकि टीएमसी के सामने अपने कैडर और वोटरों का भरोसा बनाए रखने की चुनौती होगी।

यह परिणाम स्पष्ट संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब पहले जैसी एकतरफा नहीं रही। भाजपा लगातार टीएमसी के मजबूत इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। वहीं टीएमसी को अब केवल नेतृत्व के भरोसे नहीं बल्कि मजबूत जमीनी संगठन के दम पर राजनीति करनी होगी।

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