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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो रही है और 14 जुलाई तक चलेगी। नामांकन की जांच 15 जुलाई को होगी जबकि 17 जुलाई अंतिम तिथि नाम वापस लेने की है। यदि जरूरी हुआ तो 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे परिणाम घोषित किए जाएंगे।

यहां यह बता दे कि, ये तीनों सीटें टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होने के बाद इन तीनों ने राज्यसभा सदस्यता के साथ टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया था। सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था जबकि सुस्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था।

जानकारी देते चले कि, बंगाल विधानसभा की 294 सीटों में भाजपा के पास फिलहाल 207 विधायक हैं जबकि टीएमसी के 80 विधायक दो गुटों में बंटे हुए हैं। इसमें 60-65 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ और 15 ममता बनर्जी के साथ हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा तीनों सीटें आसानी से जीत सकती है, जो ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका होगा। टीएमसी के विधायक एकजुट होने पर भी इन सीटों पर जीत हासिल नहीं कर पाएंगे।तीन सीटें जीतने के बाद राज्यसभा में भाजपा की संख्या 117 हो जाएगी और एनडीए की 145। उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 245 सदस्यों वाले सदन में 162 सांसदों की जरूरत होगी। ऐसे में एनडीए को 17 अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता रहेगी।

तीन सांसदों के इस्तीफे से खाली हुईं सीटें

ये तीनों राज्यसभा सीटें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई हैं। राज्य की राजनीति में आए बड़े बदलाव और सत्ता परिवर्तन के बाद इन नेताओं ने न केवल राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी बल्कि टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया था।

इनमें सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक शेष था, जबकि सुस्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था। ऐसे में उनके इस्तीफे के कारण इन सीटों पर निर्धारित कार्यकाल की शेष अवधि के लिए नए सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा।

ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक चुनौती

राज्यसभा उपचुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन का भी संकेत देंगे। सत्ता परिवर्तन के बाद पहले ही टीएमसी को कई राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ा है। अब यदि पार्टी राज्यसभा की ये तीनों सीटें भी खो देती है तो इसे संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से एक और बड़ा नुकसान माना जाएगा।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्यसभा में प्रतिनिधित्व किसी भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उच्च सदन में विधेयकों, संसदीय समितियों और राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

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