नई दिल्ली । ती-किसानी में किसानों को पूरे साल अलग-अलग तरह के खर्चों का सामना करना पड़ता है। फसल की बुवाई से पहले बीज और खाद खरीदने से लेकर खेत की सिंचाई, कृषि उपकरण, मजदूरी और फसल कटाई तक लगातार पैसों की जरूरत होती है। कई बार प्राकृतिक परिस्थितियों, बाजार की कीमतों या अन्य कारणों से किसानों के सामने नकदी की समस्या भी पैदा हो जाती है। ऐसे में सरकारी योजनाएं किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता के साथ-साथ संस्थागत ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सरकार हर छोटे और सीमांत किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये की मदद देती है। यह रकम हर चार महीने में 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है। इस पैसे का इस्तेमाल किसान बीज, खाद या छोटे-मोटे खेती के खर्चों के लिए करते हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत साल 1998 में हुई थी। इसके तहत किसान को खेती से जुड़े खर्चों के लिए 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। अगर किसान समय पर लोन चुका देता है, तो उसे सिर्फ 4 फीसदी सालाना ब्याज देना होता है। सामान्य ब्याज दर से सरकार 2 फीसदी की सब्सिडी और समय पर भुगतान करने पर 3 फीसदी का अतिरिक्त प्रोत्साहन देती है।
पीएम कुसुम योजना
पीएम कुसुम योजना के तहत नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय किसानों को सोलर पंप लगाने पर 60 फीसदी तक की सब्सिडी देता है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों की हिस्सेदारी शामिल है। किसान को कुल लागत का सिर्फ करीब 40 फीसदी हिस्सा ही अपनी जेब से देना होता है। इससे सिंचाई आसान होती है और बिजली या डीजल का खर्च भी कम हो जाता है।
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और कृषि मशीनीकरण योजना
कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत किसानों और किसान समूहों को 2 करोड़ रुपये तक का लोन कम ब्याज दर पर मिलता है। इससे गोदाम, कोल्ड स्टोरेज या अन्य कृषि ढांचा तैयार किया जा सकता है। कृषि मशीनीकरण योजना में आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने पर 40 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। महिला और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को इसमें विशेष छूट मिलती है।
