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नई दिल्ली।गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ते ही खेतों में आग लगने की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। अक्सर गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची सूखी नरवाई या डंठल में छोटी सी चिंगारी लगते ही पूरी फसल जलकर खाक हो जाती है। ज्यादातर मामलों में यह आग प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि इंसानी लापरवाही और छोटी-मोटी गलतियों के कारण लगती है। तेज गर्म हवाएं और लू इन चिंगारियों को तेजी से भड़का देती हैं।

इस संबंध में जानकारी दे दें कि, खेतों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह फसल कटाई के बाद बची नरवाई या पराली को खेत में ही जलाना है। किसान खेत साफ करने के शॉर्टकट में आग लगा देते हैं, लेकिन तेज हवा के कारण यह आसपास के खेतों तक फैल जाती है। इसके अलावा बिजली के ढीले तारों से निकलने वाली चिंगारी, कंबाइन हार्वेस्टर या ट्रैक्टर के साइलेंसर से निकलने वाला स्मोक और लापरवाही से फेंकी गई जलती बीड़ी-सिगरेट भी आग का कारण बनते हैं।

खेतों को नुकसान से बचाने के लिए किसानों को नरवाई जलाने की आदत छोड़कर पूसा डीकंपोजर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो पराली को खाद में बदल देती है। बिजली के ढीले तारों की शिकायत तुरंत संबंधित विभाग से करनी चाहिए। कंबाइन हार्वेस्टर चलाते समय स्पार्क अरेस्टर और पानी की टंकी साथ रखें। सूखी फसलों के आसपास भूलकर भी धूम्रपान न करें।

विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह फसल कटाई के बाद बची नरवाई या पराली को जलाना है। कई किसान खेत जल्दी साफ करने के लिए इसे आसान तरीका मानते हैं। हालांकि यह तरीका बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। तेज हवा चलने की स्थिति में आग नियंत्रण से बाहर हो जाती है और दूसरे खेतों तक फैल जाती है।

पराली जलाने से केवल आग का खतरा ही नहीं बढ़ता, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है। इससे बड़ी मात्रा में धुआं और जहरीली गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण बढ़ाती हैं। साथ ही मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरता प्रभावित होती है।

जागरूकता और सावधानी की जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में आग की घटनाओं को काफी हद तक जागरूकता और वैज्ञानिक खेती के जरिए रोका जा सकता है। किसानों को पराली जलाने से बचने, कृषि मशीनों की नियमित जांच कराने और बिजली के तारों की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है।

गर्मी के मौसम में खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी माना जाता है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग न केवल फसल को सुरक्षित रख सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकता है।

ऐसे रखें अपने खेतों का पूरा ध्यान
खेतों को इस भारी नुकसान से बचाने के लिए किसानों को नरवाई जलाने की आदत को पूरी तरह छोड़कर पूसा डीकंपोजर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए. जो पराली को खेत में ही गलाकर खाद बना देती हैं. बिजली के ढीले तारों की शिकायत तुरंत विभाग से करें और कंबाइन हार्वेस्टर चलाते समय उसमें स्पार्क अरेस्टर और पानी की टंकी हमेशा साथ रखें.

सूखी फसलों के आसपास भूलकर भी बीड़ी-सिगरेट न पिएं और खेत के चारों तरफ एक खाली पट्टी या फायर लाइन बनाकर जुताई कर दें जिससे आग आगे न बढ़ पाए. अगर कभी अचानक आग लग भी जाए तो तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन करने के साथ-साथ ट्रैक्टर-कल्टीवेटर से आग के चारों ओर की मिट्टी पलट दें जिससे उसे फैलने का रास्ता न मिले.

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