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समाचार मिर्ची

सतना। अगस्त का महीना किसानों के लिए नई कमाई का अवसर लेकर आता है। आम, अमरूद, नींबू, कटहल या अन्य फलदार पेड़ों के बगीचे में पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर अदरक और हल्दी की इंटरक्रॉपिंग करके अतिरिक्त आय हासिल की जा सकती है। मसाला, आयुर्वेद और दवा उद्योग में इन फसलों की सालभर मांग रहने से अच्छी कीमत मिलती है। सही तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और देखभाल से 8 से 9 महीने में तैयार होने वाली यह खेती निवेश पर 3 से 4 गुना तक रिटर्न दे सकती है।

इस संबंध में किसान अंशुमान सिंह के अनुसार वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर कम लागत में अच्छा मुनाफा संभव है। अगस्त के शुरुआती सप्ताह बुवाई के लिए अनुकूल होते हैं क्योंकि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे कंद तेजी से अंकुरित होते हैं। बुवाई के लिए स्वस्थ, रोगमुक्त और अंकुरित राइजोम का चयन जरूरी है। अदरक और हल्दी हल्की छनकर आने वाली धूप पसंद करती हैं, इसलिए इन्हें फलदार पेड़ों के बीच आसानी से उगाया जा सकता है। बुवाई से पहले जमीन की जुताई कर सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाएं। जलभराव से बचने के लिए 9 इंच ऊंचे बेड बनाएं और कंदों को 2 से 3 इंच गहराई पर लगाएं। कतार से कतार की दूरी 12 से 15 इंच तथा पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 इंच रखें।

आखिर में जानकारी देते चले कि, फसल चक्र 8 से 9 महीने का होता है। अगस्त में बुवाई के बाद सितंबर-अक्टूबर में तेजी से बढ़वार, नवंबर-दिसंबर में कंदों का आकार बढ़ना और जनवरी-फरवरी में फसल पकना होता है। मानसून में पानी जमा नहीं होने दें। अक्टूबर के बाद जरूरत अनुसार हल्की सिंचाई करें। बुवाई के तुरंत बाद पुआल या सूखी पत्तियों से मल्चिंग करें। हर दो महीने में निराई-गुड़ाई कर जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं। जनवरी या फरवरी के अंत में पत्तियां पीली पड़कर सूखने पर फसल खुदाई के लिए तैयार हो जाती है।वैज्ञानिक तरीके से एक एकड़ में इंटरक्रॉपिंग से अदरक की 60 से 80 क्विंटल और हल्दी की 80 से 100 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है। बगीचे की खाली जमीन का उपयोग होने से अलग खेत तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम होती है और एक ही जमीन से दोहरी कमाई संभव है। अच्छी देखभाल और उचित बाजार भाव पर प्रति एकड़ लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ कमाया जा सकता है। निराई-गुड़ाई, मल्चिंग और जैविक खाद का लाभ मुख्य फलदार पेड़ों को भी मिलता है।

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