समाचार मिर्ची

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सोमवार को सुबह कारोबार खुलने के साथ ही सोने और चांदी की कीमतों में अचानक और तेज गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों एवं उपभोक्ताओं के लिए यह खबर उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आश्चर्यजनक — इस गिरावट ने कई लोगों को खरीदारी के पुनर्विचार पर मजबूर कर दिया है।

सुबह 10.30 बजे के आसपास 1 किलो चांदी की कीमत 152,971 रुपये चल रही है। इसमें 1180 रुपये प्रति किलो की गिरावट है। चांदी ने अब तक 152,415 रुपये प्रति किलो का लो रिकॉर्ड और 153,914 रुपये प्रति किलो का हाई रिकॉर्ड बनाया है।देशव्यापी आंकड़ों के मुताबिक — 24 कैरेट सोना लगभग ₹12,513 प्रति ग्राम (≈ ₹1,25,130 प्रति 10 ग्राम), 22 कैरेट सोना लगभग ₹11,470 प्रति ग्राम (≈ ₹1,14,700 प्रति 10 ग्राम), और 18 कैरेट सोना लगभग ₹9,385 प्रति ग्राम (≈ ₹93,850 प्रति 10 ग्राम) के आसपास था।

गिरावट के क्या कारण हैं?

इस गति से गिरावट के पीछे कुछ अहम कारण सामने आ रहे हैं:

  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती: जब डॉलर मजबूत होता है, सोना-चांदी जैसे धातुओं का प्रतिफल डॉलर पर आधारित इंटर्नेशनल मार्केट में दबाव में आता है।
  • वित्तीय नीतियों की संभावित बदलाव: विशेषकर Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा का असर।
  • घरेलू मांग-सप्लाई व वातावरणिक तनाव का असर: जब निवेशक सतर्क होते हैं, तो वे सुरक्षित विकल्पों की ओर देखते हैं — लेकिन आज की गिरावट ने कई को ‘धीमे हाल में खरीदारी का अवसर’ माना।
  • स्थानीय मुद्रा रुपया-डॉलर संबंधी उतार-चढ़ाव: रुपया कमजोर हुआ तो आयातित धातुओं की लागत बढ़ सकती है, और इसके परिणामस्वरूप कीमतों में अस्थिरता देखने को मिलती है।

क्या खरीदारी का अवसर है?

गिरावट का मौका निवेशकों व उपभोक्ताओं दोनों के लिए अवसर जैसा दिख सकता है — हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • अगर आप 24 कैरेट या 22 कैरेट सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो वर्तमान भाव सही लग सकता है क्योंकि वह पिछले दिनों की ऊँची छलाँग के बाद थोड़ा नीचे आया है।
  • लेकिन सोने-चांदी जैसे धातु सिर्फ भाव पर नहीं बल्कि गुणवत्ता, हैलमार्किंग, बिक्री-करेंट डिस्काउंट, ज्वैलरी मेकिंग चार्ज आदि पर भी निर्भर करते हैं।
  • निवेश के दृष्टिकोण से देखें तो सोना-चांदी को अक्सर ‘हेज’ के रूप में देखा जाता है — मगर यह भी याद रखना होगा कि इनकी कीमतें उतार-चढ़ाव से मुक्त नहीं हैं।
  • यदि दीर्घकालीन निवेश की योजना है, तो इन उतार-चढ़ाव का लाभ उठाया जा सकता है, लेकिन यदि अल्पकालीन लाभ की उम्मीद है, तो सावधानी जरूरी है।

24 नवंबर की सुबह सोने-चांदी की मार्केट ने जो संकेत दिए हैं, वह सिर्फ एक ‘मूल्य-गिरावट’ नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक संकेत हैं — अंतरराष्ट्रीय मुद्रा, आर्थिक नीतियां, निवेशक मनोवृत्ति और घरेलू मांग-सप्लाई सब इसमें अमल में हैं।

बता दें कि, यदि निवेशक या उपभोक्ता हैं, तो यह वक्त आपके लिए सोचने-विचारने का है — क्या यह ‘विचार करने योग्य अवसर’ है, या कीमतें और नीचे जाएँगी? हर दृष्टिकोण से देखने पर कहा जा सकता है: मौका है लेकिन जोखिम भी है।अगर चाहें, तो मैं शहरवार आज के सोना-चांदी के भाव (बैंगलोर, दिल्ली, मुंबई आदि) भी निकालकर दे सकता हूँ, ताकि आप अपने शहर के भाव जान सकें।

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