गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मुजेहना के किसान रामू निषाद ने मचान विधि अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है। उन्होंने एक ही खेत में लौकी, बोड़ा (लोबिया) और करेले की खेती शुरू की है। इस तरीके से उन्हें अच्छी पैदावार के साथ बेहतर मुनाफा मिल रहा है। आसपास के किसान भी इस मॉडल से प्रेरित हो रहे हैं।
मचान विधि में बांस और तार की मदद से ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है। बेल वाली फसलें इसी मचान पर फैलती हैं। इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, फलों की गुणवत्ता अच्छी रहती है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जमीन खाली रहने से खेत की देखभाल और सिंचाई आसान हो जाती है।
रामू निषाद ने बताया कि तीनों फसलों की तुड़ाई अलग-अलग समय पर होती है, जिससे बाजार में लगातार उपज बिकती रहती है। लौकी की फसल खत्म होने वाली है, तब तक करेले में फल आना शुरू हो जाएगा और बोड़ा में भी फूल आने लगे हैं। मचान तैयार करने में 8 से 10 हजार रुपये का खर्च आया है। एक से डेढ़ बीघा में हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय हो रही है।
क्या है मचान विधि?
मचान विधि (Trellis Farming) बेलदार फसलों की खेती का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। इसमें खेत के ऊपर बांस, लकड़ी के खंभों और मजबूत तारों या रस्सियों की सहायता से एक ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद बेल वाली फसलों को इस ढांचे पर चढ़ाया जाता है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और खुला वातावरण मिलता है। बेल जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर बढ़ती है, जिससे फल साफ-सुथरे रहते हैं और उनकी गुणवत्ता बेहतर होती है। साथ ही नमी अधिक समय तक नहीं ठहरती, जिससे कई प्रकार के फफूंद और अन्य रोगों का खतरा भी कम हो जाता है।
एक खेत, तीन फसलें
रामू निषाद ने अपने खेत में ऐसी फसलों का चयन किया है जिनकी तुड़ाई अलग-अलग समय पर होती है। उन्होंने लौकी, बोड़ा (लोबिया) और करेला की खेती एक साथ की है। इससे उन्हें पूरे सीजन में लगातार उत्पादन मिलता रहता है।
किसान के अनुसार, जब लौकी की फसल समाप्त होने लगती है, उसी समय करेले में फल आना शुरू हो जाता है। इसके बाद बोड़ा (लोबिया) में भी फूल और फल आने लगते हैं। इस क्रमिक उत्पादन के कारण बाजार में लगातार सब्जियों की आपूर्ति बनी रहती है और आय का स्रोत भी नियमित बना रहता है।
फसलों की इस बेहतर योजना से बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी कुछ हद तक कम होता है, क्योंकि किसान के पास एक ही समय में अलग-अलग सब्जियां उपलब्ध रहती हैं।
हालांकि हर क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बाजार की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए किसी भी खेती मॉडल को अपनाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेना आवश्यक है। उचित योजना, बेहतर प्रबंधन और फसल विविधीकरण के साथ मचान विधि किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।
