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नई दिल्ली।आज के आधुनिक कृषि दौर में जहां उत्पादन बढ़ाने की होड़ तेज हो गई है, वहीं किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी जमीन की उर्वरता (फर्टिलिटी) को बनाए रखना बन गई है। लगातार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की प्राकृतिक शक्ति को कमजोर कर दिया है। इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक तरीकों की ओर लौटने की सलाह दी जा रही है। इसी दिशा में “मिश्रित हरी खाद (Green Manure Kit)” एक प्रभावी और सस्ता समाधान बनकर उभर रही है।

क्या है मिश्रित हरी खाद और क्यों है जरूरी?

मिश्रित हरी खाद कई तरह की हरी फसलों के बीजों का एक खास मिश्रण होता है. जब इन बीजों को खेत में बोया जाता है तो ये तेजी से बढ़ते हैं और मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर बढ़ाते हैं. इससे मिट्टी नरम, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर बन जाती है. हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ती है. पानी रोकने की क्षमता बेहतर होती है. केमिकल खादों की जरूरत कम हो जाती है और फसल की पैदावार में सुधार होता है.

क्या है मिश्रित हरी खाद?

मिश्रित हरी खाद दरअसल विभिन्न प्रकार की हरी फसलों के बीजों का एक मिश्रण होता है, जिन्हें खेत में बोकर उगाया जाता है। ये फसलें तेजी से बढ़ती हैं और कुछ समय बाद इन्हें खेत में ही जोत दिया जाता है। इसके बाद ये पौधे मिट्टी में सड़कर प्राकृतिक खाद में बदल जाते हैं।

इस प्रक्रिया से मिट्टी में जैविक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी नरम और भुरभुरी बनती है। साथ ही, इसमें नाइट्रोजन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा भी बढ़ जाती है।

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