नई दिल्ली। खीरे में कड़वाहट की मुख्य वजह कुकरबिटेसिन नामक तत्व है, जो पौधों पर पड़ने वाले तनाव के कारण बढ़ जाता है। गर्मियों में उच्च तापमान के दौरान पौधों की अतिरिक्त देखभाल जरूरी होती है। अगर सही समय पर सिंचाई और मिट्टी के पोषण का ध्यान रखा जाए तो खीरा मीठा और रसीला निकलता है।
सिंचाई में लापरवाही सबसे बड़ी गलती है। खीरे के पौधे नमी बहुत पसंद करते हैं। जैसे ही मिट्टी सूखने लगती है, पौधा तनाव में आ जाता है और कुकरबिटेसिन रिलीज करता है, जिससे फल कड़वे हो जाते हैं। मिट्टी हमेशा हल्की नम रखें। दोपहर की तेज धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट या मल्चिंग का इस्तेमाल करें। पानी का प्रबंधन सही करने से कड़वाहट की समस्या 80 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
मिट्टी की जांच कराएं और संतुलित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करें। अंधाधुंध खाद डालने से बचें। नाइट्रोजन की अधिकता और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी फलों को बेस्वाद और कड़वा बना देती है। ऑर्गेनिक खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल नेचुरल मिठास बनाए रखने में मदद करता है। पोटाश और फास्फोरस का सही संतुलन फलों के आकार और मिठास बढ़ाता है। खरपतवार को नियमित हटाएं, क्योंकि ये पोषण चुराते हैं।
अच्छी क्वालिटी के हाइब्रिड बीज चुनें, जो कड़वाहट-मुक्त होने की गारंटी देते हैं। फलों की तुड़ाई सुबह के समय करें, जब नमी का स्तर सबसे ज्यादा होता है। जरूरत से ज्यादा बड़े फल या बेल पर पकने वाले खीरे में कड़वाहट आने की संभावना बढ़ जाती है। छोटे और मध्यम साइज के खीरे स्वादिष्ट होते हैं और बाजार में उनकी मांग भी अधिक रहती है।
