नई दिल्ली। मंगलवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका-ईरान जंग और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के चलते बाजार प्रभावित हुआ।मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स पिछले बंद 77,616 के मुकाबले गिरावट लेकर 77,272 पर खुला। इसमें गिरावट तेज हुई और यह 77,063 के स्तर पर पहुंच गया, यानी 500 अंक से अधिक की गिरावट। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 24,211 के पिछले बंद से 150 अंक से ज्यादा फिसलकर 24,050 के स्तर पर पहुंचा।
इस कड़ी में जानकारी दे दें कि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, दोनों इंडेक्स में तेज रिकवरी देखने को मिली। सुबह 11 बजे के आसपास सेंसेक्स की गिरावट घटकर 260 अंक रह गई। शुरुआती कारोबार में 1,363 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर थे, जबकि 908 कंपनियों में बढ़त दर्ज की गई।गिरावट की मुख्य वजह होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और हमले बताए जा रहे हैं। इस क्षेत्र से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होती है। तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसमें ब्रेंट क्रूड 84.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 80 डॉलर के स्तर पर रहा। इस तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा।
गिरावट के साथ हुई कारोबार की शुरुआत
मंगलवार को सेंसेक्स ने पिछले कारोबारी सत्र के 77,616 अंकों के बंद स्तर के मुकाबले गिरावट के साथ 77,272 पर कारोबार शुरू किया। शुरुआती मिनटों में बिकवाली तेज होने से यह और नीचे फिसलकर 77,063 तक पहुंच गया। इस दौरान सेंसेक्स में 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
इसी तरह, निफ्टी ने भी कमजोर शुरुआत की। पिछले बंद 24,211 के मुकाबले यह 150 अंकों से अधिक टूटकर 24,050 के स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी और अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
वर्तमान परिस्थितियों में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखने और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह देते हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण अल्पकालिक उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन दीर्घकालिक निवेश निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, व्यवसाय की गुणवत्ता और आर्थिक मूलभूत कारकों का भी मूल्यांकन आवश्यक माना जाता है।
यहां यह गौर करने वाली बात हैं कि, मंगलवार का कारोबार इस बात का संकेत देता है कि वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी यह भी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों पर बाजार की नजर बनी रहेगी, जो भारतीय शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
