बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं तथा वक्फ संपत्तियों की बिक्री की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इसे राम मंदिर चढ़ावे की हेरफेर से भी बड़ा मामला बताया।
सोमवार को प्रेस वार्ता में मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक पत्र जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और वक्फ की जमीनों का गलत तरीके से उपयोग किया गया।
मौलाना ने कहा कि वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उद्देश्य गरीबों, जरूरतमंदों, यतीमों तथा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जनकल्याणकारी गतिविधियों पर खर्च करना था, लेकिन अपेक्षित स्तर पर ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।प्रेस वार्ता में हाजी नसीर अहमद नूरी, मुफ्ती फारुख मिस्बाही, हाजी नाजिम बेग, राहत हुसैन मुन्ना, काशिफ खान, डॉ. अनवर रजा कादरी और हाफिज रजी अहमद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा पत्र
सोमवार को जारी पत्र में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि वक्फ बोर्डों के कार्यों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं और कई संपत्तियों का उपयोग उनके मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वक्फ की कुछ जमीनों के संबंध में गंभीर सवाल उठते रहे हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए।
वक्फ संपत्तियों का उद्देश्य क्या है?
वक्फ संपत्तियां इस्लामी परंपरा के अनुसार धार्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए समर्पित संपत्तियां होती हैं। इनसे होने वाली आय का उपयोग आमतौर पर गरीबों की सहायता, यतीम बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, मस्जिदों और अन्य जनहितकारी कार्यों के लिए किया जाता है।
मौलाना रजवी का कहना है कि यदि इन संपत्तियों से प्राप्त आय का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हुआ है, तो इसकी जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि समाज के कमजोर वर्गों तक इन संसाधनों का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए।
फिलहाल यह मामला मौलाना शहाबुद्दीन रजवी द्वारा उठाई गई मांग और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर चर्चा में है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि संबंधित जांच प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही मानी जाएगी। ऐसे में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और संभावित सरकारी कार्रवाई पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
