दुबई के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में एशिया कप 2025 के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला शुरू हो चुका है। मैदान में जहां रोमांचक क्रिकेट देखने को मिल रहा है, वहीं देश के भीतर यह मैच राजनीतिक विवादों और सियासी घमासान का कारण बन गया है। पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद पाकिस्तान के साथ मुकाबला खेलने को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने इस फैसले को “देश के साथ ग़द्दारी” तक करार दिया है, जबकि सरकार का कहना है कि खेल को राजनीति और आतंकवाद से अलग देखा जाना चाहिए।
विपक्ष के तीखे हमले
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के अरविंद केजरीवाल ने इस मैच को देश के साथ ग़द्दारी करार दिया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “पाकिस्तान के साथ मैच खेलना देश के साथ ग़द्दारी है। हर भारतीय गुस्से में है। क्रिकेट और आतंकवाद एक साथ क्यों चल रहा है? मोदी जी जवाब दें। क्या ये भी ट्रम्प के दबाव में हो रहा है? आखिर पाकिस्तान के साथ खेलने की क्या मजबूरी है?”
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते थे कि उनकी रगों में सिंदूर दौड़ता है, उन्हें ही इस सवाल का जवाब देना चाहिए, जिन लोगों की रगों में सिंदूर दौड़ रहा है, वे ही मैच का आयोजन कर रहे हैं।
बता दें कि, एशिया कप में भारत और पाकिस्तान मैच को लेकर सरकार ने साफ किया है कि ‘खेल और ऑपरेशन सिंदूर’ दो अलग-अलग मुद्दे हैं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मैच के विरोध करना उन खिलाड़ियों के साथ अन्याय है जिन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि मैच को आयोजित करने के फैसला ‘सोच-समझकर’ लिया गया है, क्रिकेट की अपनी भावनाएं हैं जो राजनीति से परे हैं।
क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने इस विवाद से हटकर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत बहुत मजबूत टीम है, बेहद बेहतर और संतुलित। हमें खिलाड़ियों पर भरोसा करना चाहिए और यह मैच जीतकर दिखाना चाहिए कि भारत हर मोर्चे पर पाकिस्तान से आगे है।”
सरकार का बचाव
विवाद बढ़ता देख केंद्र सरकार ने भी इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए। खिलाड़ियों ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। मैच का आयोजन सोच-समझकर किया गया है और इसे आतंकवाद या किसी ऑपरेशन से जोड़कर देखना सही नहीं है।”
बता दें कि, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बंटवारा साफ देखा जा सकता है। एक वर्ग का कहना है कि खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए और खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिलना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का खेल सहयोग स्वीकार्य नहीं है।
बता दें कि, भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हमेशा से भावनाओं का खेल रहा है। इस बार एशिया कप 2025 का यह मैच सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि राजनीति और कूटनीति का भी विषय बन गया है। विपक्ष जहां इसे देशहित के खिलाफ बता रहा है, वहीं सरकार इसे खेल भावना से जोड़कर देख रही है। सवाल यही है कि क्या खेल और आतंकवाद को अलग रखना संभव है? और क्या ऐसे मैच वास्तव में दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में कोई भूमिका निभा सकते हैं?
