नई दिल्ली।भारत की आगामी जनगणना 2027 का पहला चरण कल 1 अप्रैल से शुरू होगा। दूसरे चरण की जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में शुरू होगी। आधिकारिक आंकड़ा 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि के आधार पर तय किया जाएगा।पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से मकान और घरेलू जानकारी पर केंद्रित हैं। इनमें मकान की बनावट, इस्तेमाल की गई सामग्री (मिट्टी, लकड़ी, सीमेंट आदि), दीवार-छत की सामग्री, मकान का उपयोग (आवासीय या दुकान), हालत, परिवार की कुल संख्या, मुखिया का नाम, लिंग, अनुसूचित जाति या जनजाति की स्थिति, जाति संबंधी जानकारी, मालिकाना हक, विवाहित जोड़ों की संख्या, कमरों की संख्या, पीने के पानी का स्रोत, रोशनी का स्रोत, शौचालय, गंदे पानी की निकासी, स्नान की सुविधा, रसोई, LPG/PNG कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल, साइकिल, स्कूटर, कार आदि शामिल हैं।
प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। लोग सेल्फ-एन्यूमरेशन के माध्यम से पोर्टल se.census.gov.in पर खुद जानकारी भर सकेंगे। इसमें राज्य चुनकर, मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर डालकर रजिस्ट्रेशन, भाषा चयन, OTP वेरिफिकेशन, जिला-शहर विवरण भरना, मैप पर लोकेशन सेट करना और 33 सवालों के जवाब देना शामिल है। सबमिट करने पर SE ID मिलेगी, जिसे जनगणना कर्मी सत्यापन के लिए दिखाना होगा। एक मोबाइल नंबर से केवल एक घर रजिस्टर हो सकेगा।
जनगणना में जियो-रेफरेंसिंग तकनीक का उपयोग होगा, जिसमें हर घर की सटीक लोकेशन डिजिटल मैप पर दर्ज की जाएगी। इससे कोई मकान छूटने या दोबारा गिने जाने की संभावना नहीं रहेगी। सेल्फ-एन्यूमरेशन में उपयोगकर्ता मैप पर लाल मार्कर को घर की सही जगह सेट करेंगे। आजादी के बाद पहली बार जाति डेटा भी जुटाया जाएगा।
जियो-मैपिंग क्या है?
इस बार की जनगणना में जियो-रेफरेंसिंग या जियो-मैपिंग तकनीक का उपयोग एक बड़ा बदलाव है। इसका मतलब है कि हर घर की सटीक भौगोलिक स्थिति (लोकेशन) को डिजिटल मैप पर दर्ज किया जाएगा।
सेल्फ-एन्यूमरेशन के दौरान यूजर को एक डिजिटल मैप दिखाई देगा, जिसमें लाल मार्कर को अपने घर की सही जगह पर सेट करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी मकान छूट न जाए और एक ही मकान को दो बार गिना न जाए।
जियो-मैपिंग तकनीक से सरकार को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सटीक योजना बनाने में मदद मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, पानी, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना इसी डेटा के आधार पर बनाई जा सकेगी।
डिजिटल और सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा
इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं, जिसे “सेल्फ-एन्यूमरेशन” कहा जाता है। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
प्रक्रिया में राज्य का चयन, परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना, OTP के जरिए सत्यापन, भाषा का चयन और फिर जिले व शहर की जानकारी भरना शामिल है। इसके बाद यूजर को मैप पर अपने घर की लोकेशन सेट करनी होगी और 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
फॉर्म सबमिट करने के बाद एक विशेष SE ID (Self Enumeration ID) जारी होगी, जिसे जनगणना कर्मी को सत्यापन के दौरान दिखाना होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक मोबाइल नंबर से केवल एक ही घर का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
जनगणना 2027 न केवल देश की जनसंख्या का आंकड़ा जुटाने का माध्यम है, बल्कि यह भारत के विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी है। डिजिटल तकनीक और जियो-मैपिंग के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पहले से अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
