नई दिल्ली। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे भारत में एलपीजी की कीमतें बढ़ रही हैं और कमी देखी जा रही है। भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।पुणे के राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के वैज्ञानिकों ने 20 वर्षों के शोध के बाद डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) गैस विकसित की है, जो एलपीजी का घरेलू विकल्प है। यह गैस कोयला या बायोमास से देश में ही उत्पादित की जा सकती है।
डीएमई गैस एलपीजी की तुलना में काफी सस्ती है। इसमें 8 प्रतिशत डीएमई मिलाने से भारत को हर साल लगभग 9,500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। शुरू में बाजार में 8 प्रतिशत मिश्रण लाने की योजना है, जबकि शोध में 20 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक मिश्रण संभव पाया गया है।
डीएमई मौजूदा सिलिंडर और चूल्हों में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल की जा सकती है। यह एलपीजी जितनी ही ऊर्जा देती है, सुरक्षित रूप से जलती है और न्यूनतम हानिकारक उत्सर्जन के साथ स्वच्छ ईंधन मानी जाती है। वर्तमान में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसमें रोजाना 250 किलोग्राम डीएमई गैस का उत्पादन हो रहा है।
