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भोपाल, मध्य प्रदेश की सबसे स्वच्छ और व्यवस्थित शहर के रूप में मशहूर इंदौर में दूषित पानी की वजह से मची तबाही ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अब तक इस घटना में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2800 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। गुरुवार को ही 338 नए मरीज सामने आए और 32 गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने इस पूरे मामले पर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने इसे ‘पाप’ करार देते हुए कहा कि जिंदगियों की कीमत मात्र दो लाख रुपये मुआवजे से नहीं चुकाई जा सकती, बल्कि इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ित परिवारों से माफी मांगनी होगी और दोषियों को अधिकतम सजा दी जानी होगी।

उन्होंने आगे कहा, “जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।”

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से पानी में बैक्टीरियल संक्रमण (संभवतः ई. कोलाई या अन्य जलजनित बैक्टीरिया) के कारण हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की कुछ पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज होने और सीवर लाइन के साथ पानी की लाइन के निकट होने के कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच गया। इंदौर नगर निगम ने अब तक कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन समस्या अभी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हुई है।

यह घटना न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक सबक है कि विकास और स्वच्छता के दावों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं, खासकर पीने के पानी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीड़ित परिवारों का दर्द और उनका आक्रोश बता रहा है कि अब केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई और पारदर्शिता की जरूरत है।

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